संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट, साजिश और अफवाहों को बताया वजह

संभल हिंसा पर गठित न्यायिक आयोग ने राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश बताते हुए अफवाहों और भड़काऊ गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

लखनऊ : संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने अपनी 121 पृष्ठों की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे पूर्व नियोजित साजिश के संकेत मिले हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 19 नवंबर को हुए सर्वे के बाद से ही संभल में माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिशें शुरू हो गई थीं। आयोग ने कहा कि अदालत के आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और मुस्लिम समुदाय के बीच यह धारणा बनाई गई कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाया जाएगा। जबकि न्यायालय का आदेश केवल प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत सर्वे और उससे संबंधित व्यवस्थाओं तक सीमित था।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में संभल के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के प्रतिनिधि सुहेल इकबाल और जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे के विरोध के लिए लोगों को मस्जिद पहुंचने के लिए प्रेरित किया गया, जिसके बाद भीड़ उग्र हो गई।

जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि भीड़ के बीच कथित तौर पर भड़काऊ नारे लगाए गए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद पथराव, आगजनी और गोलीबारी जैसी घटनाएं हुईं। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि 28 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। रिपोर्ट में सात पुलिसकर्मियों को गोली लगने की बात भी दर्ज की गई है।

आयोग ने यह भी कहा है कि उपद्रवियों ने पुलिस के हथियार और अन्य सामान छीनने का प्रयास किया। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को रिपोर्ट में प्रभावी और संयमित बताया गया है। आयोग के अनुसार, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए और घातक हथियारों के इस्तेमाल से बचते हुए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं। आयोग ने अदालत के आदेशों की सही जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने, अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने और संवेदनशील मामलों में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की सिफारिश की है।

आयोग ने संभल में पहले हुई सांप्रदायिक घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लंबे समय की रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।

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