लखनऊ : उत्तर प्रदेश की अठारहवीं विधानसभा का वर्ष 2026 का तृतीय सत्र 3 से 5 अगस्त तक संपन्न हुआ। तीन दिवसीय इस सत्र के दौरान सदन की कुल कार्यवाही 5 घंटे 32 मिनट चली। इसमें 2 घंटे 49 मिनट का स्थगन रहा, जबकि 2 घंटे 43 मिनट तक सदन की कार्यवाही प्रभावी रूप से संचालित हुई।
इस सत्र के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 12 महत्वपूर्ण विधेयकों को पुनर्स्थापित कर पारित किया गया। इनमें उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) विधेयक 2026 सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक शामिल रहे।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय से संबंधित चार संशोधन विधेयक, रजिस्ट्रीकरण (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2026, भारतीय स्टाम्प (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2026, उत्तर प्रदेश वानिकी और औद्यानिकी विश्वविद्यालय विधेयक 2026 तथा उत्तर प्रदेश विनियोग (2026-27 का अनुपूरक) विधेयक 2026 भी पारित किए गए। अधिकांश विधेयक 4 अगस्त को और अनुपूरक विनियोग विधेयक 5 अगस्त को पारित हुआ।
विधानसभा सचिवालय की याचिका समिति को इस सत्र के दौरान कुल 435 याचिकाएं प्राप्त हुईं। जांच के बाद इनमें से 282 याचिकाएं स्वीकार योग्य पाई गईं, जबकि 49 याचिकाएं अस्वीकार की गईं। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त 104 याचिकाओं को व्यपगत घोषित किया गया।
संसदीय कार्यवाही से जुड़े विभिन्न नियमों के तहत प्राप्त सूचनाओं और प्रस्तावों का भी निस्तारण किया गया। नियम-103 के तहत प्राप्त सभी 7 प्रस्ताव स्वीकार किए गए। वहीं नियम-51 के अंतर्गत प्राप्त 233 सूचनाओं और नियम-311 के तहत प्राप्त 3 सूचनाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर अस्वीकार किया गया। नियम-56 के तहत 17 सूचनाएं, नियम-301 के तहत 167 और नियम-300 के तहत 4 सूचनाएं प्राप्त हुईं।
प्रश्न व्यवस्था के मामले में भी विधानसभा ने डिजिटल व्यवस्था को आगे बढ़ाया। सत्र के दौरान कुल 2,427 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 490 तारांकित और 1,466 अतारांकित प्रश्न स्वीकार किए गए। इनमें से 120 तारांकित और 838 अतारांकित प्रश्नों के उत्तर सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए।
विधानसभा के अनुसार, कुल प्रश्नों में से 95.67 प्रतिशत प्रश्न ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त हुए और उनके उत्तर भी डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराए गए। इससे ई-विधान प्रणाली और डिजिटल संसदीय प्रक्रिया को मजबूती मिली।
सत्र के दौरान विधायी कार्यों के समयबद्ध निष्पादन, संसदीय प्रक्रियाओं के प्रभावी संचालन और डिजिटल व्यवस्था के उपयोग ने उत्तर प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में काम किया।




