दादा-दादी, नाना-नानी परिवार की मजबूत नींव : शशिधर लाल अग्रवाल

मनोहर लाल अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, लोहरदगा में दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

लोहरदगा। मनोहर लाल अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, लोहरदगा में दादा-दादी एवं नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। साथ ही गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित दादा-दादी, नाना-नानी एवं अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए महाविद्यालय की प्रभारी नीतू जी ने कहा कि दादा-दादी एवं नाना-नानी परिवार में वटवृक्ष के समान होते हैं। वे बच्चों को संस्कार देने के साथ अपने जीवन के अनुभवों से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। ऋद्धि दीदी ने अतिथियों का परिचय एवं स्वागत कराया।

रितेश आचार्य जी के मार्गदर्शन में दादा-दादी एवं नाना-नानी पूजन कार्यक्रम हुआ। इस दौरान भैया-बहनों ने अपने दादा-दादी एवं नाना-नानी के चरण धोकर, तिलक लगाकर, प्रसाद खिलाया और आरती उतारकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शशिधर लाल अग्रवाल, सचिव अजय प्रसाद, शीला अग्रवाल के प्रधानाचार्य संजीव कुमार झा तथा शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे ने सभी बुजुर्गों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में छात्राओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। बहन पुष्पानाथ ने दादा-दादी एवं नाना-नानी के महत्व पर कविता प्रस्तुत कर सभी को भावुक कर दिया।
अध्यक्ष शशिधर लाल अग्रवाल ने कहा कि दादा-दादी एवं नाना-नानी से बच्चों का आत्मीय संबंध अमूल्य होता है। जिस परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, वह परिवार सौभाग्यशाली होता है। बच्चों को अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए और उनकी इच्छाओं का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्या भारती संस्कारयुक्त शिक्षा के साथ बच्चों में पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्तों की समझ विकसित करने के लिए समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करती है। उन्होंने कहा, “जिस घर में दादा-दादी, नाना-नानी होते हैं, उस घर की नींव मजबूत होती है।”

गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर निबंध प्रतियोगिता

कार्यक्रम के दूसरे चरण में गोस्वामी तुलसीदास जयंती मनाई गई। रेणु दीदी ने तुलसीदास जी के जीवन एवं साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे हिंदी साहित्य के महान कवि और भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे। उन्होंने अपना जीवन श्रीराम की भक्ति एवं लोक कल्याण के संदेश को प्रसारित करने में समर्पित किया। उनका साहित्य मनुष्य को यह संदेश देता है कि महानता धन और पद से नहीं, बल्कि अच्छे आचरण एवं कर्मों से प्राप्त होती है।
जयंती के अवसर पर भैया-बहनों के बीच निबंध लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रांत के निर्देशानुसार कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों ने “देशहित में नागरिक कर्तव्य” तथा कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों ने “स्व का बोध और हमारा दायित्व” विषय पर निबंध प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन कविता कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रेणु कुमारी ने किया। समारोह में भैया-बहनों के दादा-दादी, नाना-नानी सहित कक्षा 11वीं एवं 12वीं के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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