घर को संस्कारशाला बनाएं, बच्चों में अच्छे संस्कार डालें: विवेकानंद छात्रावास

लचरागढ़ के विवेकानंद छात्रावास में अभिभावक बैठक के दौरान बच्चों की शिक्षा, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर जोर दिया गया, परिवार से सहयोग की अपील हुई।
लचरागढ़ : बच्चों को शिक्षित बनाने के साथ उनमें अच्छे संस्कार विकसित करने के लिए घर का वातावरण भी संस्कारयुक्त होना जरूरी है। इसी संदेश के साथ वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड द्वारा संचालित विवेकानंद छात्रावास, लचरागढ़ के परिसर में अभिभावक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बच्चों की शिक्षा, अनुशासन, पारिवारिक वातावरण और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जीवन में अपनाने पर जोर दिया गया। अभिभावकों से छात्रावास में बच्चों को दिए जा रहे संस्कारों को घर में भी बनाए रखने और व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहयोग करने की अपील की गई।

बैठक की अध्यक्षता छात्रावास के वरिष्ठ अभिभावक एवं समाजसेवी मानिकचंद साहू ने की। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने कहा कि छात्रावास में बच्चों को केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बड़ों का सम्मान करने की शिक्षा भी दी जाती है। भोजन से पहले मंत्र का उच्चारण, सुबह-शाम प्रार्थना और बड़ों के प्रति आदर जैसे संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रधानाचार्य ने अभिभावकों से आग्रह किया कि छुट्टियों में बच्चों को घर ले जाने के दौरान भी संस्कारयुक्त वातावरण बनाए रखें। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन मंत्र के साथ भोजन करें और बच्चे सुबह उठकर अपने से बड़ों को प्रणाम करें। उन्होंने कहा कि घर में प्रेम, सम्मान, प्रार्थना और राष्ट्रीय भावना से जुड़े संस्कारों को नियमित रूप से अपनाने से बच्चों में अच्छे व्यवहार की आदत विकसित होती है। घर को संस्कारशाला बनाने से छात्रावास में सीखे गए मूल्य परिवार और समाज तक पहुंचेंगे।

छात्रावास की व्यवस्था में अभिभावकों की भागीदारी जरूरी

प्रधानाचार्य ने छात्रावास की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अभिभावकों से नियमित सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को समय पर विद्यालय पहुंचाना और छुट्टी के समय उन्हें लेने आना अभिभावकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रत्येक माह के दूसरे और अंतिम रविवार को अभिभावकों से छात्रावास आकर बच्चों से मिलने का आग्रह किया।

इस दौरान अभिभावकों से बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखने और तेल, साबुन, कॉपी, पेन सहित आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने को कहा गया। यदि बच्चों को किसी वस्तु की कमी हो या कोई समस्या सामने आए, तो इसकी जानकारी छात्रावास प्रमुख को देने की अपील की गई, ताकि समय रहते आवश्यक व्यवस्था की जा सके।

राष्ट्र निर्माण में अहम है संस्कारयुक्त शिक्षा: मानिकचंद साहू

बैठक की अध्यक्षता कर रहे मानिकचंद साहू ने कहा कि वनवासी कल्याण केंद्र का कार्य केवल छात्रावास चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बच्चों को वनवासी समाज का भविष्य बताते हुए कहा कि उनकी शिक्षा, व्यक्तित्व और संस्कारों के विकास में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने अभिभावकों से छात्रावास के प्रयासों में सहयोग करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

बैठक में छात्रावास प्रमुख सुनीति कुमारी, सह-प्रमुख अर्जुन महतो, सह-प्रमुख आर्यन बड़ाईक, अंजलि कुमारी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। बैठक का समापन राष्ट्रगान और बच्चों को संस्कारी एवं शिक्षित बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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