गिरिडीह : पारसनाथ पहाड़ी क्षेत्र में संदिग्ध नक्सली गतिविधियों की सूचना पर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाकर भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है। पीरटांड़ थाना क्षेत्र के जोगीडीह नाला और आसपास के घने जंगलों में चलाए गए अभियान के दौरान 494 जिलेटिन रॉड, 9 बंडल कॉर्डेक्स वायर और 16 कमर्शियल डेटोनेटर मिले। सुरक्षा बलों ने इसके अलावा कुछ संचार उपकरण और अन्य सामग्री भी जब्त की है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार के निर्देश पर 28 अक्टूबर की रात संयुक्त अभियान की रणनीति तैयार की गई थी। इसके बाद 29 अक्टूबर को जिला पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने पारसनाथ की पहाड़ियों, जोगीडीह नाला तथा आसपास के दुर्गम जंगली इलाकों में सघन तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान सुरक्षा बलों को छिपाकर रखी गई विस्फोटक सामग्री मिली।
494 जिलेटिन रॉड और 16 डेटोनेटर बरामद
पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, तलाशी के दौरान 494 जिलेटिन रॉड, 9 बंडल कॉर्डेक्स वायर और 16 कमर्शियल डेटोनेटर बरामद किए गए। इसके अतिरिक्त दो क्षतिग्रस्त वायरलेस सेट, दो काले रंग की रबर सीलिंग और एक क्षतिग्रस्त स्विच भी मिला है।
बरामद वायरलेस सेट मोटोरोला और टॉकअबाउट कंपनी के बताए गए हैं। वहीं, डेटोनेटर भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त अवस्था में थे। सुरक्षा बलों ने बरामद सामग्री को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा बल अलर्ट
पारसनाथ का पहाड़ी और घने जंगलों वाला इलाका सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का छिपाकर रखा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर विषय है। पुलिस के अनुसार, संयुक्त अभियान का उद्देश्य संदिग्ध नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाना और किसी संभावित अप्रिय घटना को रोकना था।
फिलहाल संबंधित क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तलाशी और जांच जारी है। बरामद विस्फोटक सामग्री किसने और किस उद्देश्य से छिपाकर रखी थी, इसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच में सामग्री के स्रोत और इससे जुड़े लोगों के संबंध में अहम जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस और सीआरपीएफ की इस संयुक्त कार्रवाई को पारसनाथ क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, बरामद सामग्री के पीछे किसी विशेष संगठन या व्यक्ति की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।



