राजीव रंजन
रांची : झारखंड भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने छात्र आंदोलन से जुड़े युवाओं पर दर्ज आपराधिक मुकदमों को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज होना बेहद चिंताजनक है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन धाराओं को लगाने का आधार क्या था।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार और छह अन्य राज्यों की ओर से न्यायालय का रुख कर राहत देने के उदाहरण सामने आए हैं। ऐसे में झारखंड सरकार ने अब तक छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा कर अभियोजन वापस लेने या अन्य न्यायिक राहत के लिए हाईकोर्ट में पहल क्यों नहीं की, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाना उसकी प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। शाहदेव के अनुसार, छात्र आंदोलन के दौरान सरकार के मंत्री धरना स्थल पर पहुंचे थे। वहां उन्होंने छात्रों के साथ डांस किया और उन्हें जूस भी पिलाया था। उस समय छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की बातें भी कही गई थीं, लेकिन बाद में इस दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
भाजपा प्रवक्ता ने परीक्षा परिणाम रद्द किए जाने के मामले को लेकर भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक आदेश जारी कर करीब दो दर्जन परीक्षाओं के परिणाम रद्द कर दिए, लेकिन आदेश को इस तरह तैयार किया गया कि हाईकोर्ट में उससे राहत नहीं मिल सकी। उन्होंने दावा किया कि याचिका के डिफेक्टिव होने के बावजूद सरकार की ओर से उसका प्रभावी विरोध नहीं किया गया।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान सरकार के व्यवहार और बाद में उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर अपनाई गई चुप्पी में बड़ा अंतर नजर आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि धरना स्थल पर छात्रों के साथ खड़े होकर उन्हें भरोसा दिलाना बाद की परिस्थितियों में केवल दिखावा साबित हुआ।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि वह छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर वास्तव में गंभीर थी, तो अब तक कानूनी स्तर पर पहल क्यों नहीं की गई। शाहदेव ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और छात्रों को राहत दिलाने के लिए ठोस कानूनी कदम उठाने चाहिए।



