गिरिडीह में बाल विवाह के खिलाफ ग्राम सभाओं ने लिया बड़ा संकल्प

गांधी जयंती पर गिरिडीह की विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह मुक्त गांव बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ, पंचायतों और सामाजिक संगठनों ने अभियान को गति दी।

विलियम जैकब

गिरिडीह : गांधी जयंती के अवसर पर जिले की विभिन्न पंचायतों में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह मुक्त ग्राम बनाने का संकल्प पारित किया गया। इस अभियान को आगे बढ़ाने में स्थानीय सामाजिक संगठन बनवासी विकास आश्रम, गिरिडीह ने पंचायती राज विभाग के सहयोग से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बनवासी विकास आश्रम राष्ट्रीय स्तर के बाल अधिकार नेटवर्क जस्ट राइटस फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है और बाल विवाह मुक्त भारत अभियान से भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।

संस्था के सचिव एवं बाल अधिकार कार्यकर्ता सुरेश कुमार शक्ति ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत बाल विवाह की रोकथाम और उन्मूलन के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले पात्र गांवों को बाल विवाह मुक्त ग्राम के रूप में प्रमाणित करने की प्रक्रिया तय की गई है।

इसी क्रम में झारखंड महिला विकास समिति, रांची से प्राप्त निर्देश के आलोक में गिरिडीह के उपायुक्त श्री रामनिवास यादव ने जिले के संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों को 2 अक्टूबर 2026 को आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पात्र गांवों को बाल विवाह मुक्त ग्राम घोषित करने के लिए आवश्यक प्रस्ताव पारित कराने का निर्देश दिया था।

निर्देश में बाल विवाह निषेध पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन सुनिश्चित करने, संबंधित गांवों में बाल विवाह की रोकथाम के लिए निगरानी, सूचना एवं रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करने और ग्राम स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, धार्मिक स्थलों और अन्य सामुदायिक स्थानों के माध्यम से जागरूकता गतिविधियों को बढ़ावा देने का निर्देश भी दिया गया था।

कई पंचायतों में पारित हुआ प्रस्ताव

श्री शक्ति ने बताया कि बनवासी विकास आश्रम की पहल पर जमुआ प्रखंड के बेरहाबाद, करोडीह, धरमपुर-चितरडीह और बलगो, पीरटांड़ प्रखंड के मंडरो और सीमरकोढ़ी तथा बगोदर प्रखंड के जरमुने पश्चिमी और जरमुने पूर्वी समेत कई पंचायतों में बाल विवाह मुक्त पंचायत बनाने के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से बाल विवाह की रोकथाम और इसके उन्मूलन के लिए संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति नहीं है, बल्कि यह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकारों को प्रभावित करने वाली गंभीर समस्या है। इसके पूरी तरह उन्मूलन के लिए प्रशासन, पंचायत, विद्यालय, आंगनबाड़ी, धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के साथ समुदाय की संयुक्त भागीदारी जरूरी है।

सामूहिक प्रयास पर दिया गया जोर

अभियान को सफल बनाने में उत्तम कुमार तिवारी, उज्ज्वल मिश्रा, रूपा कुमारी, भागीरथी देवी, अविनाश पाठक, उत्तम कुमार सिंह सहित अन्य सहयोगियों की भूमिका सराहनीय रही। विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।

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