बिहार में नशे के बढ़ते जाल पर बच्ची मंडल का बड़ा हमला, उठे सवाल

राजद नेता बच्ची मंडल ने युवाओं में बढ़ते नशे पर चिंता जताते हुए शराबबंदी की व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए।

संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट

समस्तीपुर : हसनपुर विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ राजद नेता रामनारायण मंडल उर्फ बच्ची मंडल ने युवाओं में बढ़ते मादक पदार्थों और सूखे नशे के सेवन पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि नशे की गिरफ्त में आने के कारण युवा समय से पहले असामयिक मौत का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी दिनचर्या में बदलाव लाने, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने की अपील की।

बच्ची मंडल ने आरोप लगाया कि इन दिनों असामाजिक तत्वों द्वारा नशे का बड़ा रैकेट चलाया जा रहा है, जिससे समाज में अराजकता का माहौल बन रहा है। उन्होंने कहा कि नशे के साथ जुए का खेल भी कई जगहों पर चल रहा है। उनके मुताबिक सरकारी संस्थानों और मंदिर-मस्जिद के आसपास भी अवैध शराब की तस्करी का धंधा जारी है।

राजद नेता ने कहा कि नशेड़ियों के कारण स्कूल और कोचिंग जाने वाले छात्र-छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इन गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने में अभिभावक भी कई बार असहज महसूस करते हैं।

बिहार में शराबबंदी को लेकर बच्ची मंडल ने सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मद्य निषेध अभियान की सफलता के लिए सरकार की ओर से लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद युवाओं में शराब, ड्रग्स, अफीम, चरस और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन चिंता का विषय बना हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार करने वाले लोग फल-फूल रहे हैं। बच्ची मंडल का कहना है कि नशे की लत में फंसे कुछ युवा आगे चलकर अपराध की ओर भी बढ़ रहे हैं और हथियार के बल पर राहगीरों से लूटपाट जैसी घटनाओं में शामिल हो रहे हैं।

बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य सरकार सुशासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक शराबबंदी के कारण राज्य को राजस्व की भी व्यापक क्षति हो रही है और मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हुई है।

बच्ची मंडल ने नशामुक्ति अभियान के तहत होने वाली कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई में गरीब मजदूर वर्ग के लोग अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने दावा किया कि संपन्न लोगों के मामलों में कथित तौर पर लेनदेन के जरिए मामले मैनेज कर लिए जाते हैं। हालांकि, ये उनके लगाए गए आरोप हैं और इनके समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र आंकड़ा या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने नशामुक्ति अभियान के नाम पर पुलिस प्रशासन को कार्रवाई के लिए कई तरह की व्यवस्थाएं दी हैं, लेकिन इससे अवैध कमाई की शिकायतें भी सामने आती हैं। उन्होंने सरकार से शराब माफिया और अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की।

बच्ची मंडल ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू हुए कई वर्ष बीतने के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका है। उन्होंने इसे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला विषय बताया।

उन्होंने नशामुक्ति केंद्रों की भूमिका को और प्रभावी बनाने की मांग करते हुए कहा कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी गंभीरता से काम किया जाना चाहिए। उनके अनुसार नशे की समस्या को केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं, बल्कि उपचार, जागरूकता और सामाजिक सहयोग के जरिए भी दूर किया जा सकता है।

राजद नेता ने कहा कि यदि प्रशासन ईमानदारी और गंभीरता से नशामुक्ति अभियान को लागू करे तथा आम लोग भी इसके खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाएं, तो अवैध शराब कारोबारियों के हौसले कमजोर किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और समाज में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की।

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