सिमडेगा । प्रखंड मुख्यालय स्थित बाजार टांड़ में कुछ दिन पूर्व आग लगने से गुमटी दुकान समेत लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया था। इस घटना से आर्थिक संकट में आई शिल्पी देवी और उनके परिवार के लिए शनिवार का दिन राहत और नई उम्मीद लेकर आया। समाजसेवी भरत प्रसाद ने आगे बढ़कर पीड़ित परिवार की मदद की। उन्होंने शिल्पी देवी की दुकान में दोबारा जरूरी सामान उपलब्ध कराया। साथ ही उनकी तीन बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए कॉपी-पेन भी दिए।
बताया गया कि कुछ दिन पहले देर रात करीब 2 से 3 बजे बाजार टांड़ स्थित शिल्पी देवी की गुमटी दुकान में अचानक आग लग गई थी। देखते ही देखते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया और अंदर रखा सारा सामान जलकर नष्ट हो गया। घटना के समय शिल्पी देवी परिवार के साथ बाहर थीं। सोमवार सुबह करीब 10 बजे जब वह मौके पर पहुंचीं तो दुकान को पूरी तरह जला हुआ देखकर उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
पति की मौत के बाद तीन बेटियों की जिम्मेदारी
दुकान के जल जाने के बाद परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया। शिल्पी देवी के पति स्वर्गीय ज्योतिष कुमार का निधन हो चुका है। इसके बाद वह अपनी तीन बेटियों की जिम्मेदारी अकेले संभाल रही हैं। परिवार के भरण-पोषण का प्रमुख साधन यही दुकान थी। दुकान के जल जाने से रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बेटियों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए चुनौती बन गया था।
पीड़ित परिवार की स्थिति की जानकारी मिलने पर समाजसेवी भरत प्रसाद ने मदद का निर्णय लिया। उन्होंने दुकान में आवश्यक सामान दोबारा उपलब्ध कराया, ताकि शिल्पी देवी फिर से दुकान शुरू कर परिवार का भरण-पोषण कर सकें। बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें कॉपी-पेन भी उपलब्ध कराया गया।
मुसीबत में साथ खड़ा होना ही मानव सेवा : भरत प्रसाद
भरत प्रसाद ने कहा कि मुसीबत किसी के जीवन में बताकर नहीं आती। ऐसे समय में जरूरतमंद परिवार के साथ खड़ा होना और उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने में सहयोग करना ही सच्ची मानव सेवा है। महिला और उनकी बेटियों की स्थिति को देखते हुए उन्होंने सहयोग का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो और बच्चियों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो।
मदद पाकर भावुक हुईं शिल्पी देवी
दुकान में दोबारा सामान मिलने के बाद शिल्पी देवी भावुक हो उठीं। उन्होंने भरत प्रसाद के प्रति आभार जताते हुए कहा कि आग लगने के बाद उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि परिवार को कैसे संभालें और दुकान फिर से कैसे शुरू करें। ऐसे मुश्किल समय में मिली मदद ने उन्हें काफी सहारा दिया है। उन्होंने कहा कि भरत प्रसाद के इस सहयोग को वह जीवनभर नहीं भूलेंगी।
स्थानीय लोगों ने भी समाजसेवी भरत प्रसाद की पहल की सराहना की। लोगों का कहना है कि जरूरतमंद को केवल आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास भी समाज के लिए प्रेरणादायक है। आग ने शिल्पी देवी की दुकान को भले ही राख में बदल दिया, लेकिन मदद के इस प्रयास ने परिवार के जीवन में नई उम्मीद और आगे बढ़ने का हौसला जरूर जगा दिया।




