मनीष सिन्हा
धनबाद : उपायुक्त धनबाद और वरीय आरक्षी अधीक्षक के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत BIT सिंदरी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें छात्रों को साइबर अपराध के विभिन्न स्वरूप, उससे होने वाले नुकसान और बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को कम उम्र से ही साइबर सुरक्षा के प्रति सजग करना और उन्हें ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियों से परिचित कराना रहा। पुलिस अधिकारियों ने डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ सामने आ रही साइबर अपराध की चुनौतियों पर भी चर्चा की।
फर्जी लिंक और अनजान कॉल से रहें सावधान
अधिकारियों ने छात्रों को सलाह दी कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अज्ञात नंबर से आने वाले फोन या मैसेज पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। उन्होंने व्यक्तिगत, बैंकिंग या अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की अपील की।
बताया गया कि साइबर अपराधी कई बार बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, रिश्तेदार या किसी प्रतिष्ठित संस्थान के कर्मचारी बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। इनाम, नौकरी, निवेश, लोन, KYC अपडेट और बिजली बिल जैसे अलग-अलग बहानों से फर्जी लिंक भेजकर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा सकता है।
OTP और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें
छात्रों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि OTP, ATM या डेबिट कार्ड की जानकारी, बैंक खाता विवरण, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।
सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर भी छात्रों को जागरूक किया गया। उन्हें अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, निजी तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक करने और संदिग्ध लिंक या मैसेज को आगे भेजने से बचने की सलाह दी गई। मोबाइल फोन में मजबूत पासवर्ड रखने और उसे समय-समय पर बदलते रहने के लिए भी कहा गया।
साइबर ठगी होने पर तुरंत दें सूचना
पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर घबराने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना देनी चाहिए। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को रोकने या उसकी रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट की सुरक्षा, फर्जी कॉल और लिंक तथा साइबर ठगी की स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों से जुड़े सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने उनके सवालों का जवाब देकर जिज्ञासाओं का समाधान किया।
सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर भी किया जागरूक
अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराध केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं है। फर्जी प्रोफाइल बनाना, ऑनलाइन उत्पीड़न, निजी तस्वीरों का दुरुपयोग और पहचान संबंधी धोखाधड़ी भी साइबर अपराध के दायरे में आते हैं। छात्रों को इनसे बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम में बताया गया कि धनबाद पुलिस की ओर से साइबर अपराध की रोकथाम और आम लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में विद्यालयों और अन्य संस्थानों में भी साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाएं, पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।




