गिरिडीह I जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों, स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों और उनसे निपटने के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा के लिए सिंदवरिया पंचायत भवन में पंचायत एवं ग्राम सभा स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। जागो फाउंडेशन ने GROW+ Fund के सहयोग से बैठक का आयोजन किया। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों, ग्रीन चैंपियंस, जल सहिया, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
बैठक में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जल संरक्षण एवं प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि, आजीविका सुरक्षा, सामुदायिक सहभागिता और आपदा जोखिम कम करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बदलती जलवायु का असर अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती, पानी, रोजगार, स्वास्थ्य और ग्रामीणों के दैनिक जीवन पर भी दिखाई दे रहा है।
कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए जागो फाउंडेशन के कम्युनिकेशन एवं फंडरेजिंग हेड बिरेन्द्र वर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने बताया कि संस्था 12 ग्रीन चैंपियंस को प्रशिक्षण दे रही है, ताकि वे जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर गांवों में जागरूकता बढ़ा सकें। बैठक में ग्रीन चैंपियंस ने प्रशिक्षण से मिली जानकारी और अपने अनुभव भी साझा किए।
कचरा नहीं जलाने की अपील
ग्रीन चैंपियन स्नेहा कुमारी ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने प्लास्टिक का उपयोग कम करने, उसके पुनः उपयोग और कचरे के उचित निपटान पर जोर दिया।
स्नेहा ने ग्रामीणों से कचरा नहीं जलाने की अपील करते हुए कहा कि इससे वातावरण प्रदूषित होता है और मानव स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने घर और समुदाय स्तर पर कचरे को अलग-अलग रखने तथा उसके उचित प्रबंधन की जरूरत बताई।
बारिश के पानी को बचाने पर जोर
जागो फाउंडेशन की डॉली कुमारी ने जल संरक्षण एवं प्रबंधन पर जानकारी देते हुए कहा कि पानी जीवन का आधार है। भविष्य में जल संकट से बचने के लिए अभी से पानी बचाने की आदत विकसित करनी होगी। उन्होंने वर्षा जल संरक्षण, पानी के पुनः उपयोग और घरेलू स्तर पर पानी की बर्बादी रोकने के उपाय बताए।
उन्होंने कहा कि वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर बनाए रखने और भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
बदलते मौसम के अनुरूप खेती जरूरी
ग्रीन चैंपियन नेहा कुमारी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सीधा प्रभाव कृषि पर पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को बदलते मौसम और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखते हुए जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने कम पानी में होने वाली फसलों, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और खेती के साथ वैकल्पिक आजीविका के अवसर विकसित करने पर भी जोर दिया।
पौधरोपण के साथ पेड़ों की देखभाल जरूरी
ग्रीन चैंपियन आशा वर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का उदाहरण देते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति से बंजर भूमि को भी हरा-भरा बनाया जा सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पेड़ पर्यावरण संरक्षण के साथ जल और मिट्टी संरक्षण, तापमान संतुलन तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
समाजसेवी डी.एम.डी. अल्गुन्दिया ने कहा कि प्रकृति से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल आवश्यकता और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने ग्रीन चैंपियंस द्वारा जलवायु और पर्यावरण से जुड़े विषयों की जानकारी साझा करने की सराहना करते हुए कहा कि अब इन बातों को व्यवहार में उतारने की जरूरत है।
पंचायत के हर वार्ड में कचरा प्रबंधन
सिंदवरिया पंचायत के मुखिया रामेश्वर वर्मा ने बैठक के आयोजन के लिए जागो फाउंडेशन का आभार जताते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण सीधे भविष्य से जुड़े विषय हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत में प्रत्येक वार्ड में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की गई है और ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से भी जल संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें वर्षा जल संचयन और वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जागो फाउंडेशन के गेंदों वर्मा ने बताया कि संस्था ग्रीन चैंपियंस के माध्यम से पांच गांवों में कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई, पौधरोपण एवं पौधों की देखभाल, जल संरक्षण और पुनः उपयोग तथा प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने जैसे विषयों पर समुदाय के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रीन चैंपियंस का उद्देश्य स्वयं जानकारी हासिल करने के साथ बच्चों, युवाओं और ग्रामीणों को जोड़कर स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे बदलावों को बढ़ावा देना है।
बैठक में उपमुखिया डीलचंद वर्मा, पंचायत सचिव, समाजसेवी डी.एम.डी. अल्गुन्दिया, दयाल तुरी, विकास कुमार, डॉली कुमारी, बिरेन्द्र वर्मा, गेंदों वर्मा समेत ग्रीन चैंपियंस खुशबू कुमारी, नेहा कुमारी, सपना कुमारी, निक्की कुमारी, अंशु कुमारी, कविता कुमारी, जल सहिया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
अंत में प्रतिभागियों ने जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर सहमति जताई। साथ ही समुदाय को बदलती परिस्थितियों के प्रति अधिक सक्षम और लचीला बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया।




