गैस सिलेंडर से हादसे के बाद उठे सवाल, फायर सेफ्टी व्यवस्था की खुली पोल
मनीष सिन्हा | लोक मंत्र
धनबाद: बलियापुर प्रखंड के मुकुंदा स्थित नया प्राथमिक विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनाने के दौरान गैस सिलेंडर में लगी आग ने सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गनीमत रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इसने यह जरूर उजागर कर दिया कि जिले के कई सरकारी विद्यालयों में आग से बचाव के इंतजाम न के बराबर हैं।
जिस रसोई में प्रतिदिन बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, वहां सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम भी मौजूद नहीं हैं। सवाल उठ रहा है कि यदि किसी स्कूल की रसोई में अचानक आग लग जाए तो उससे निपटने की तैयारी कितनी है? क्या रसोइयों को आग बुझाने का प्रशिक्षण दिया गया है? क्या स्कूलों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं? इन सवालों के जवाब व्यवस्था को तलाशने होंगे।
मुकुंदा में टला बड़ा हादसा
बलियापुर के नया प्राथमिक विद्यालय हरिबोल थान, मुकुंदा में शुक्रवार को मध्याह्न भोजन तैयार करने के दौरान गैस सिलेंडर में अचानक आग लग गई थी। कुछ ही देर में रसोई धुएं और लपटों से भर गई। स्थानीय लोगों की तत्परता से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और बच्चों व शिक्षकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
इस घटना ने जिले के अन्य सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल को मजबूर कर दिया है।
मध्य विद्यालय हीरापुर में नहीं मिला फायर एक्सटिंग्विशर
धनबाद के मध्य विद्यालय हीरापुर में जांच के दौरान रसोई में गैस सिलेंडर और भोजन बनाने की व्यवस्था तो मिली, लेकिन आग बुझाने के लिए कोई अग्निशमन यंत्र नहीं मिला।
रसोइयों ने बताया कि गैस लीक होने की स्थिति में वे रेगुलेटर बंद कर देती हैं, लेकिन यदि सिलेंडर में आग लग जाए तो उसे नियंत्रित करने के लिए उनके पास कोई उपकरण उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया जाएगा।
बीएसएस बालिका मध्य विद्यालय में भी सुरक्षा व्यवस्था नदारद
कंबाइंड बिल्डिंग स्थित बीएसएस बालिका मध्य विद्यालय में भी स्थिति अलग नहीं मिली। यहां भी रसोई में गैस सिलेंडर पर भोजन तैयार किया जा रहा था, लेकिन आग से बचाव के लिए कोई आधुनिक उपकरण मौजूद नहीं था।
महिला रसोइयों ने बताया कि आग लगने की स्थिति में वे पानी में भीगा बोरा डालकर आग बुझाने का प्रयास करेंगी। फायर एक्सटिंग्विशर या अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई।
छात्रों को नहीं दिया जाता आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण
सबसे चिंता की बात यह है कि जिन विद्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहते हैं और जहां रोज गैस सिलेंडर का उपयोग होता है, वहां फायर सेफ्टी को लेकर कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
अधिकांश रसोइयों को आग बुझाने का प्रशिक्षण नहीं मिला है। वहीं स्कूलों में नियमित मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन से जुड़े अभ्यास भी नहीं कराए जाते हैं। ऐसे में किसी बड़े हादसे की स्थिति में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध कराने की होगी मांग
जिला शिक्षा अधीक्षक शालिनी डुंगडुंग ने कहा कि मुकुंदा विद्यालय की घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना विभाग की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि सभी विद्यालयों में फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध कराने के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके अलावा अग्निशमन विभाग के सहयोग से स्कूलों में मॉक ड्रिल कराने और बच्चों व शिक्षकों को आग से बचाव का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जाएगी।
मुकुंदा की घटना एक चेतावनी है कि सरकारी स्कूलों की रसोई में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। सवाल सिर्फ एक विद्यालय का नहीं, बल्कि उन सभी स्कूलों का है जहां रोज बच्चों का भोजन गैस सिलेंडर पर तैयार होता है। समय रहते यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।




