बच्चों के व्यवहार को समझने की पहल, चेंगरबासा में हुई अहम बैठक

चेंगरबासा स्कूल में अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास, व्यवहार, भावनाओं और नियमित पढ़ाई को लेकर विस्तार से संवाद किया।

गिरिडीह : गिरिडीह प्रखंड के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत अलगुंदा के ग्राम चेंगरबासा स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय, चेंगरबासा में निर्धारित तिथि पर अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीपीएम) का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास (सोशल इमोशनल लर्निंग- एसईएल) को लेकर अभिभावकों की समझ और भागीदारी बढ़ाना था।

बैठक की शुरुआत विद्यालय के बाल संसद, विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) और शिक्षकों द्वारा अभिभावकों का तिलक लगाकर स्वागत करने के साथ हुई। इसके बाद अभिभावकों के साथ बच्चों के शैक्षणिक, व्यवहारिक और भावनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से संवाद किया गया।

जागो फाउंडेशन की ओर से प्रखंड समन्वयक विलियम जेकब ने इस दौरान “लकड़ी का कटोरा” कहानी प्रस्तुत की। कहानी के माध्यम से अभिभावकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि बच्चों के व्यवहार को केवल देखकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। उनके व्यवहार के पीछे छिपी भावनाओं और अनुभवों को समझना भी जरूरी है। कहानी सुनाए जाने के बाद अभिभावकों से उनके विचार और अनुभव साझा करवाए गए। पीपीएम गाइड में भी इस कहानी को बच्चों के अनुभवों, भावनाओं और व्यवहार को समझने तथा एसईएल से जोड़ने वाली प्रमुख गतिविधि के रूप में शामिल किया गया है।

इसके बाद जागो फाउंडेशन के बिरेंद्र कुमार वर्मा ने अभिभावकों और शिक्षकों के साथ बच्चों के शैक्षणिक विकास, नियमित विद्यालय उपस्थिति, व्यवहारिक विकास और समग्र व्यक्तित्व निर्माण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बच्चे के सीखने और उसके व्यवहार पर भावनाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बच्चों की भावनाओं को समझना, उनकी बात ध्यान से सुनना और उनके साथ सकारात्मक संवाद करना अभिभावकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि पीपीएम सत्र का उद्देश्य अभिभावकों को भावनाओं, व्यवहार और सीखने के बीच संबंध को समझने में सक्षम बनाना भी है। बैठक के दौरान “भावनाओं के फूल – मेरी भावनाएं, मेरे बच्चे की भावनाएं” गतिविधि कराई गई। इसके माध्यम से अभिभावकों को अपनी भावनाओं और अपने बच्चों की संभावित भावनाओं को पहचानने तथा उन्हें व्यक्त करने का अवसर मिला।

रंगों, चित्रों और प्रतीकों के जरिए अभिभावकों ने अपनी तथा अपने बच्चों से जुड़ी भावनाओं को समझने का प्रयास किया। इस गतिविधि का उद्देश्य सही या गलत उत्तर तलाशना नहीं, बल्कि बच्चों के अनुभवों के प्रति संवेदनशीलता और उनके व्यवहार को लेकर जिज्ञासा विकसित करना था।

इस दौरान अभिभावकों को बताया गया कि हर भावना महत्वपूर्ण होती है और कोई भी भावना अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती। बच्चों के व्यवहार को तुरंत जज करने के बजाय उनकी भावनाओं को समझना, उनसे सवाल करना और उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनना जरूरी है।

बैठक में अभिभावकों को घर पर अपनाए जा सकने वाले छोटे-छोटे व्यवहारिक उपायों के लिए भी प्रेरित किया गया। इनमें बच्चे से बिना टोके कुछ मिनट बातचीत करना, उसके दिन और भावनाओं के बारे में पूछना, उसे सुधारने से पहले उसकी बात सुनना तथा उसके सकारात्मक व्यवहार की सराहना करना शामिल है।

बिरेंद्र कुमार वर्मा ने अभिभावकों से बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने और उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को संवेदनशीलता के साथ समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब अभिभावक बच्चों की बात सुनते और उन्हें समझते हैं, तो बच्चे अपनी बात साझा करने, सीखने और परिवार से जुड़ने में अधिक सहज महसूस करते हैं।

बैठक का उद्देश्य केवल एक दिन की चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यालय और समुदाय में बच्चों के भावनात्मक एवं मानसिक कल्याण को लेकर निरंतर संवाद की प्रक्रिया को मजबूत करना भी रहा। सम्पूर्णा 2.0 के पीटीएम सत्र को इस वर्ष होने वाली संवाद श्रृंखला की पहली कड़ी के रूप में विकसित किया गया है। इसके तहत अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों के भावनात्मक एवं मानसिक कल्याण को बेहतर सहयोग देने की दिशा में काम करेंगे।

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक महेंद्र प्रसाद निराला, विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष राजेश कुमार वर्मा, जागो फाउंडेशन के बिरेंद्र कुमार वर्मा, प्रखंड समन्वयक विलियम जेकब, शिक्षक हातिम अंसारी, नागेश्वर प्रसाद वर्मा सहित अन्य शिक्षक, अभिभावक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाध्यापक महेंद्र प्रसाद निराला और शिक्षक हातिम अंसारी ने उपस्थित अभिभावकों, शिक्षकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

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