मनीष सिन्हा
बाघमारा : MMDR संशोधन कानून 2026 के विरोध में 7 सितंबर को बाघमारा प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रस्तावित विशाल धरना-प्रदर्शन को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन (JCMU) ने शनिवार को संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान आम लोगों, मजदूरों, किसानों, आदिवासी-मूलवासी समाज और खनन प्रभावित लोगों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई।
बाघमारा प्रखंड कार्यालय के समीप आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में वक्ताओं ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के प्रावधानों और उससे जुड़े संभावित प्रभावों पर अपनी चिंताएं सामने रखीं। उन्होंने कहा कि कानून के प्रावधानों को लेकर आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने की आवश्यकता है।
राज्यों के अधिकारों पर प्रतिबंध को लेकर जताई चिंता
वक्ताओं ने दावा किया कि MMDR संशोधन कानून 2026 में राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर नए कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाने से प्रतिबंधित करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने संशोधन में शामिल नई धारा 9D का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकारों अथवा खनिज-युक्त भूमि पर किसी भी नाम से कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाने पर रोक का प्रावधान राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करता है।
प्रेस कांफ्रेंस में यह भी कहा गया कि संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा लगाए गए ऐसे शुल्कों में बकाया अथवा वसूल नहीं की गई राशि को अमान्य किए जाने का प्रावधान भी चिंता का विषय है। वक्ताओं के अनुसार, इससे खनिज संपदा वाले राज्यों के वित्तीय हितों पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का दिया हवाला
रतिलाल टुडू ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया मामले में जुलाई 2024 में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 8:1 के बहुमत से राज्यों की खनिज अधिकारों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने की विधायी क्षमता को बरकरार रखा था।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को 1 अप्रैल 2005 से पुराने कर बकाये की वसूली की अनुमति भी दी थी। ऐसे में MMDR संशोधन कानून 2026 में राज्यों के कराधान संबंधी अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर संघीय ढांचे, राज्यों के अधिकार और खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व के बंटवारे को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्यों में खनन से प्राप्त राजस्व का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, जनकल्याण, बुनियादी सुविधाओं और प्रभावित समुदायों के हित में किया जाता है। इसलिए ऐसे प्रावधानों को लेकर व्यापक जनचर्चा जरूरी है।
7 सितंबर को बाघमारा में धरना
JMM और JCMU नेताओं ने कहा कि 7 सितंबर का धरना-प्रदर्शन किसी एक संगठन तक सीमित कार्यक्रम नहीं है, बल्कि राज्य के अधिकारों और खनन प्रभावित लोगों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने का अवसर है। उन्होंने सभी वर्गों के लोगों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।
संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में रतिलाल टुडू, जोनल उपाध्यक्ष BCCL, कमलेश्वर कुमार महथा, पर्यवेक्षक एवं केंद्रीय समिति सदस्य, मनोज रवानी, पर्यवेक्षक एवं जिला संगठन सचिव, धीरेन रवानी, प्रखंड अध्यक्ष, रंजित महतो, जिला समिति सदस्य, सहजाद अंसारी, प्रदीप वर्मा, शंकर रवानी, वाकिल अंसारी, होरील रवानी, मुकेश सिंह, समीर कुमार, मानिकचंद महतो, उमेश प्रसाद रवानी, लोबिन किस्कू सहित अन्य कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।




