लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय आत्म-प्रचार में अधिक व्यस्त है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के बार-बार अयोध्या दौरे और प्रतिदिन 2.3 करोड़ रुपये कथित तौर पर प्रचार संबंधी विज्ञापनों पर खर्च किए जाने के बावजूद सरकार को जनता के बीच अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
अखिलेश यादव ने कहा कि लखनऊ अग्निकांड में अपने बच्चे को खो चुकी एक मां के साथ मुख्यमंत्री के कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आने के बाद लोगों को कोविड-19 महामारी के दौरान एक जिलाधिकारी, एक प्रोफेसर और एक पत्रकार के साथ मुख्यमंत्री के कथित व्यवहार की घटनाएं भी याद आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं ने सरकार की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किए हैं।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार का कार्यकाल अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं, दोषपूर्ण एसआईटी गठन, विपक्षी नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने, बुलडोजर कार्रवाई के कथित दुरुपयोग, फर्जी एनकाउंटर, पीडीए वर्ग पर अत्याचार, हिरासत में मौतों, प्रशासन के अपराधीकरण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के लिए याद किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि डबल इंजन सरकार के भीतर कथित टकराव का असर प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं पर दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार बिजली, पानी और सड़क जैसी आवश्यक सेवाओं की स्थिति प्रभावित हुई है, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि केवल विज्ञापनों और प्रचार अभियानों के सहारे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री आत्ममंथन करें तो उन्हें यह समझ आएगा कि “उनका प्रचार तंत्र ही उनका अंत कर रहा है।”




