मनीष सिन्हा
धनबाद : इस्कॉन धनबाद की ओर से 4 सितंबर को न्यू टाउन हॉल में भव्य जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन किया गया। शाम 5 बजे से मध्य रात्रि 12 बजे तक चले इस आयोजन में 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान भक्ति, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया।
आयोजकों के अनुसार, महोत्सव में 700 से अधिक वीआईपी अतिथि पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए पांच स्थानों पर निरंतर अभिषेक की व्यवस्था की गई थी। 18 से अधिक संस्थाओं ने 10 से ज्यादा संस्कृतियों को दर्शाते हुए 22 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस दौरान 10 हजार से अधिक प्लेट महाप्रसाद का वितरण भी किया गया।
फूलों और कृष्ण थीम से सजा न्यू टाउन हॉल
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए टाउन हॉल में करीब 3 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा बाहर बड़े पंडाल में भी श्रद्धालुओं के लिए बैठने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम को देखने के लिए तीन एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं।
टाउन हॉल, पंडाल और गोल्फ ग्राउंड के मुख्य प्रवेश द्वार तक की सजावट रंग-बिरंगे फूलों, मोर पंख, मुरली और माखन की थीम पर की गई थी। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
मधुर कीर्तन से शुरू हुआ उत्सव
शाम 5 बजे मधुर कीर्तन और भजनों के साथ जन्माष्टमी समारोह की शुरुआत हुई। मृदंग और करताल की धुन पर बड़ी संख्या में भक्तों ने श्रीकृष्ण का स्वागत किया। आईआईटी के छात्रों ने मंगलाचरण प्रार्थना प्रस्तुत की, जिसके बाद पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कीर्तन के बाद इस्कॉन के उपाध्यक्ष और अध्यक्ष श्रीमान नाम प्रेम प्रभुजी ने कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य आविर्भाव का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सामान्य जीव अपने जन्म से जुड़ी परिस्थितियों का चुनाव नहीं करता, जबकि भगवान का अवतरण उनकी दिव्य इच्छा के अनुसार होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान के दिव्य जन्म और कर्म को समझने का प्रयास करने का संदेश दिया।
राधा-कृष्ण का हुआ भव्य महाभिषेक
इसके बाद श्री श्री राधा-कृष्ण के युगल विग्रहों का दही, दूध, मधु, शर्करा, पुष्प, फलों के रस और गंगाजल से महाभिषेक किया गया। कुल पांच युगल विग्रहों का अभिषेक हुआ। इसमें मुख्य अतिथियों और श्रद्धालुओं को भी भाग लेने का अवसर मिला।
आयोजन स्थल पर एक साथ अलग-अलग स्थानों पर श्री विग्रहों के अभिषेक की व्यवस्था की गई थी, जिसे देखने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
18 संस्थाओं ने प्रस्तुत किए 22 से अधिक कार्यक्रम
जन्माष्टमी महोत्सव में नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। 18 से अधिक संस्थाओं की ओर से 10 से ज्यादा संस्कृतियों की झलक प्रस्तुत की गई। झारखंड के कर्मा, टुसू और सरहुल जैसे लोक नृत्यों को भी अलग-अलग पारंपरिक वेशभूषा और सामग्री के साथ प्रस्तुत किया गया।
इन प्रस्तुतियों के जरिए कृष्ण भक्ति का संदेश देने का प्रयास किया गया। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।
कथा के बाद मध्य रात्रि में हुआ श्रीकृष्ण का प्राकट्य
रात करीब 10 बजे श्रीमान नाम प्रेम प्रभुजी ने मुख्य कथा प्रस्तुत की। उन्होंने श्रील प्रभुपाद की शिक्षाओं और शास्त्रों का उल्लेख करते हुए भगवान कृष्ण को अपने जीवन में आमंत्रित करने के लिए भक्ति और साधना के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से हरे कृष्ण महामंत्र का जप और हरिनाम संकीर्तन से जुड़ने का आह्वान किया। मध्य रात्रि 12 बजे महाआरती और उत्साहपूर्ण कीर्तन के साथ भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य उत्सव मनाया गया।
इस दौरान सैकड़ों किलो फूलों से फूलों की होली खेली गई। तेज बारिश के बीच भी श्रद्धालु कीर्तन और नृत्य में झूमते रहे। न्यू टाउन हॉल का वातावरण श्रीकृष्ण के जयघोष और भक्ति संगीत से गूंज उठा।
56 भोग के साथ भक्तों को मिला महाप्रसाद
भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से तैयार 56 भोग अर्पित किया गया। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं के बीच इस्कॉन की विशेष खिचड़ी और हलवा प्रसाद वितरित किया गया।
निर्जल व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष अनुकल्प प्रसाद की भी व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा महाप्रसाद, पूजा सामग्री, गीता-भागवत जैसे धार्मिक ग्रंथ और भक्ति वृक्ष कार्यक्रम से जुड़ी सामग्री के लिए विभिन्न स्टॉल लगाए गए थे।
महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को भविष्य में बनने वाले इस्कॉन मंदिर की योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी भी दी गई।

18 संस्थाओं ने प्रस्तुत किए 22 से अधिक कार्यक्रम


