सेंट जेवियर कॉलेज में उच्च शिक्षा के भविष्य पर हुआ बड़ा मंथन

सेंट जेवियर कॉलेज महुआडांड़ की राष्ट्रीय संगोष्ठी में AI, नई शिक्षा नीति, कौशल, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मनोज सिंह

महुआडांड़ : सेंट जेवियर कॉलेज (स्वायत्त), महुआडांड़ में बुधवार को “उच्च शिक्षा के नए प्रतिमान की पुनर्कल्पना” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, तकनीकी विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार और विद्यार्थियों के समग्र विकास जैसे विषयों पर विस्तार से मंथन हुआ।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सिस्टर पॉलिन ऑगस्टीन, सुपीरियर जनरल, सेंट ऐनीज ऑफ लूजर्न (SAL) ने उच्च शिक्षा की मौजूदा चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते दौर में उच्च शिक्षा के पारंपरिक स्वरूप पर नए सिरे से विचार करना जरूरी है। शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, मानवीय संवेदना, नैतिक मूल्यों, रचनात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की हैं। शिक्षण संस्थानों को इन तकनीकों का सकारात्मक और रचनात्मक इस्तेमाल कर शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करनी चाहिए। साथ ही तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय मूल्यों और शिक्षक-विद्यार्थी संबंधों को मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है।

सिस्टर पॉलिन ऑगस्टीन ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षा और रोजगार के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों से निपटने, समस्याओं का समाधान खोजने, नेतृत्व करने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए। इसके लिए उच्च शिक्षा में आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता देनी होगी।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा पर जोर

सिस्टर पॉलिन ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सुदूर क्षेत्रों के विद्यार्थियों में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और समान अवसर उपलब्ध कराने की है।

उन्होंने स्थानीय भाषा, संस्कृति, परंपरा और ज्ञान-परंपराओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार ऐसी शिक्षा अधिक प्रभावी होगी, जो विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखते हुए राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने रखा दृष्टिकोण

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोस ने कहा कि बदलते शैक्षणिक और तकनीकी परिवेश में उच्च शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार पाने वाले विद्यार्थी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और सक्षम नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने उच्च शिक्षा को अधिक बहुविषयक, लचीला, विद्यार्थी-केंद्रित और कौशल-आधारित बनाने के नए अवसर दिए हैं। शिक्षण संस्थानों को इन अवसरों का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता के साथ अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को भी बढ़ावा देना चाहिए।

प्राचार्य ने कहा कि सेंट जेवियर कॉलेज, महुआडांड़ जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र में उच्च शिक्षा के अवसरों को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने शिक्षा के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि इसमें “ज्ञान के साथ चरित्र, कौशल के साथ संवेदना और तकनीक के साथ मानवीयता” का विकास होना चाहिए।

AI, नई शिक्षा नीति और कौशल आधारित शिक्षा पर चर्चा

राष्ट्रीय संगोष्ठी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल शिक्षा, कौशल-आधारित शिक्षा, बहुविषयक अध्ययन, अनुसंधान एवं नवाचार, रोजगारपरक शिक्षा, समावेशी शिक्षा तथा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि भविष्य की उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी, गुणवत्तापूर्ण, तकनीक-सक्षम, कौशल-केंद्रित और मानवीय मूल्यों पर आधारित बनाया जाना चाहिए।

शिक्षकों और कर्मचारियों की रही सक्रिय सहभागिता

कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर फा. समीर, फा. लियो, फा. राजीप, सिस्टर चन्द्रोदया, प्रो. मनीषा, प्रो. बंसती, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश और प्रो. मोनिका सहित शिक्षकेत्तर कर्मचारी अनोरा दीदी, सुनीता दीदी, क्रिस्टीना दीदी, प्रेमा, सरोज, नीलम, अशोक, सुचित, जयप्रकाश और संतोष मौजूद रहे।

शिक्षकों और कर्मचारियों ने संगोष्ठी के विषय पर अपने विचार और सक्रिय सहभागिता के माध्यम से कार्यक्रम को सार्थक बनाया। संगोष्ठी का मूल संदेश रहा कि उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना केवल पाठ्यक्रम या शिक्षण पद्धति में बदलाव तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा के उद्देश्य, दृष्टिकोण और समाज के प्रति उसकी भूमिका को नए सिरे से समझने की प्रक्रिया है।

कार्यक्रम में ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, जिसमें ज्ञान और तकनीक के साथ मानवीयता, नैतिकता, समानता और सामाजिक उत्तरदायित्व भी केंद्र में रहें।

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