रांची। झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के बाद करीब 2 हजार ऐसे कर्मचारियों के सामने नौकरी का संकट खड़ा हो गया है, जिन्हें इसी परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद सरकारी विभागों में नियुक्ति मिली थी। बारिश के बीच झारखंड मंत्रालय के बाहर बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंता जताते नजर आए। कुछ घंटे पहले तक सरकारी दफ्तरों में ड्यूटी कर रहे इन युवाओं को अब नौकरी बचने की उम्मीद और आशंका के बीच संघर्ष करना पड़ रहा है।
बारिश में मंत्रालय के बाहर छलका दर्द
गिरिडीह के रोशन कुमार की कहानी इस संकट की गंभीरता बताती है। इतिहास से स्नातक रोशन ने 2019 से सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह महंगी कोचिंग नहीं ले सके। उनके पिता छोटी पान की दुकान चलाते हैं, जबकि मां पैरा-टीचर हैं। जेएसएससी-सीजीएल में चयन के बाद जनवरी में उन्हें नेपाल हाउस में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर नियुक्ति मिली थी। परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद उन्होंने अपनी मां से कहा, सब खत्म हो गया मां। हजारीबाग की चंदा कुमारी भी इस फैसले से बेहद परेशान हैं। वह मंत्रिमंडल सचिवालय एवं सतर्कता विभाग में कनिष्ठ सचिवालय सहायक के पद पर कार्यरत थीं। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी चंदा पर परिवार की जिम्मेदारी है।
उनका कहना है कि जिस कार्यालय में वह रोज पहचान पत्र दिखाकर प्रवेश करती थीं, उसी कार्यालय के बाहर अब उन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए खड़ा होना पड़ रहा है। नौकरी जाने की स्थिति में पूरे परिवार के भविष्य पर असर पड़ने की चिंता उन्हें सता रही है। हजारीबाग से रांची पहुंचे सुधीर कुमार ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा और बीटेक किया है। वह गुरुग्राम में निजी नौकरी कर चुके हैं और रेलवे में चयन के बाद प्रशिक्षण भी लिया था। इसके बावजूद उन्होंने झारखंड सरकार की नौकरी को प्राथमिकता दी, ताकि बुजुर्ग मां के पास रह सकें। करीब 31 वर्ष की उम्र में उन्हें चिंता है कि दोबारा परीक्षा की तैयारी करते-करते उनकी उम्र सीमा खत्म हो सकती है।
विवादों में रही भर्ती प्रक्रिया
जेएसएससी-सीजीएल भर्ती प्रक्रिया पहले से ही कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर विवादों में रही है। मामला अदालत तक पहुंचने के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। नियुक्तियां हो जाने के बाद परीक्षा रद्द होने से विवाद और गहरा गया है। प्रभावित कर्मचारी और अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका सवाल है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो उसकी कीमत उन युवाओं से क्यों वसूली जाए, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति हासिल की और अपने पद पर काम भी शुरू कर दिया था। अब करीब 2 हजार कर्मचारियों का भविष्य सरकार के अगले फैसले और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर है।




