प्रयागराज के स्वरूपरानी अस्पताल पर नया नाम देने की मांग, राजभर मुखर

मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल का नाम शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखने की मांग की और इसे उनके बलिदान का सम्मान बताया।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने प्रयागराज स्थित स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल का नाम बदलकर अमर क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर रखने की मांग उठाई है। नौ अगस्त को काकोरी एक्शन की 100वीं वर्षगांठ और क्रांति दिवस से पहले सामने आई इस मांग ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वह और उनकी पार्टी सुभासपा स्वरूपरानी अस्पताल का नाम बदलने के प्रस्ताव का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें स्वरूपरानी नेहरू के नाम से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ठाकुर रोशन सिंह के योगदान और बलिदान को भी उचित सम्मान मिलना चाहिए।

राजभर ने कहा कि पिछली गलतियों को सुधारने का यह सही समय है। उन्होंने मांग की कि नौ अगस्त को काकोरी एक्शन की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रयागराज की मलाका जेल, जो वर्तमान में स्वरूपरानी अस्पताल के रूप में जानी जाती है, का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किया जाए।

नेहरू परिवार के नाम पर संस्थानों का भी दिया हवाला

ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि प्रयागराज में नेहरू परिवार के नाम पर 40 से अधिक संस्थान हैं। ऐसे में ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर अस्पताल का नाम रखने से किसी के सम्मान या अपमान का सवाल नहीं उठता।

उन्होंने उम्मीद जताई कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उनके प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। राजभर ने महाराजा सुहेलदेव राजभर के सम्मान का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें सम्मान मिलने में लगभग एक हजार वर्ष लग गए, जबकि विदेशी आक्रांता सलार मसूद गाजी की पूजा किए जाने की बात सामने आती रही।

मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रखेंगे प्रस्ताव

राजभर ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और अपनी मांग उनके सामने रखेंगे। उन्होंने कहा कि अस्पताल का नाम ऐसे महापुरुष के नाम पर होना चाहिए, जिसने देश के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा।

हालांकि, राजभर ने स्वरूपरानी नेहरू के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वरूपरानी नेहरू का सम्मान उनके हृदय में पहले भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा। उन्होंने उन्हें मोतीलाल नेहरू की पत्नी और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मां बताते हुए उनके योगदान को स्मरणीय बताया।

अब राजभर की इस मांग पर सरकार और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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