रांची : देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोपों को लेकर रांची में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ। विभिन्न आदिवासी-मूलवासी संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में रांची विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से विशाल विरोध मार्च निकाला गया। मार्च अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने सभा कर निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी दहन किया।
प्रदर्शन के बाद आयोजित जनसभा में विभिन्न नागरिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वक्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने और केंद्र सरकार से उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
नेताओं ने उठाए सवाल, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
अजय तिर्की, अध्यक्ष, केंद्रीय सरना समिति: अजय तिर्की ने कहा कि एसआईआर को लेकर देशभर में आम जनता के बीच भारी आक्रोश है। ऐसे हालात में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है।
एस अली, अध्यक्ष, आमया संगठन: एस अली ने एसआईआर अभियान को अपारदर्शी और गैर-जवाबदेह बताते हुए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत नागरिकों को मिले मतदान के अधिकार से उन्हें वंचित किया जा रहा है। उनके मुताबिक, योग्य और पात्र मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कागजात और दस्तावेजों के नाम पर अशिक्षित, विस्थापित तथा भूमिहीन गरीब लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
लक्ष्मीनारायण मुंडा, संयोजक, आदिवासी समन्वय समिति: लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि मतदाता पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी आम जनता पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैध और अवैध मतदाताओं की पहचान करना सरकार तथा प्रशासन की जिम्मेदारी है। गरीब लोगों को जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए भटकाना उनकी परेशानी बढ़ाने वाला कदम है।
कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जताया विरोध
जनसभा को गोलेसटंग डुंगडुंग, ज्योत्सना केरकेट्टा, विवेक बास्के और उत्तम यादव ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने निर्वाचन आयोग की इस नीति पर कड़ा विरोध जताया और मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने के आरोपों पर चिंता व्यक्त की।
बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
राष्ट्रव्यापी विरोध के समर्थन में आयोजित मार्च और पुतला दहन कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में मो. फुरकान, जियाउद्दीन अंसारी, नौशाद आलम, इसरार आलम, औरंगजेब आलम, मो. इकराम, मोईज अहमद, गुलजार खान, सिद्दीक अंसारी, अंजुम खान, मोहसिन हवारी, संजय लोहरा, कृष्णा लोहरा, मौनव्वर हुसैन भुट्टो, मो. साजिद, सविता कच्छप, रूपचन केवट, प्रशांत टोप्पो, कैलाश तिर्की और बाहा लिंडा समेत कई लोग मौजूद रहे।
प्रदर्शन के माध्यम से संगठनों ने मांग की कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की जाए और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए। साथ ही, उन्होंने निर्वाचन आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने और इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग उठाई।




