रामगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल, रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने तीन औद्योगिक हादसों की जांच रिपोर्ट और प्रदूषण पर कार्रवाई की मांग उठाई।

रामगढ़ I औद्योगिक इकाइयों में हुए हादसों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जिले में बढ़ते प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई की मांग को लेकर शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने समर्थकों के साथ रामगढ़ समाहरणालय गेट पर धरना दिया। धरने में श्रीराम पावर एंड स्टील, मां छिन्नमस्तिका आयरन एंड सीमेंट तथा झारखंड इस्पात से जुड़े हादसों की जांच और उसके आधार पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई।

पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने कहा कि उन्होंने उपायुक्त को आवेदन देकर तीनों औद्योगिक हादसों की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इससे पहले 10 सितंबर को भी समाहरणालय के मुख्य द्वार पर धरना दिया गया था। 19 सितंबर को उन्होंने घोषणा की थी कि यदि 24 सितंबर तक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई तो 25 सितंबर को यशवंत सिन्हा के साथ धरना दिया जाएगा। यह घटनाक्रम पूर्व में प्रकाशित रिपोर्टों में भी दर्ज है।

श्रीराम पावर एंड स्टील की जांच पर उठाए सवाल

श्रीराम पावर एंड स्टील प्लांट में हुए फर्नेस ब्लास्ट की जांच को लेकर यशवंत सिन्हा और शंकर चौधरी ने विस्तृत रिपोर्ट की मांग की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सिन्हा ने 9 अगस्त 2026 के प्रशासनिक आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि जांच समिति को नौ बिंदुओं पर जांच करनी थी। इनमें हादसे के वास्तविक कारण, सुरक्षा मानकों का पालन, फर्नेस की तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन इंतजाम, श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण एवं प्रशिक्षण, लाइसेंस और वैधानिक स्वीकृतियां, मानवीय लापरवाही, प्रबंधन की जिम्मेदारी तथा भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के उपाय शामिल थे।

सिन्हा की ओर से उठाए गए सवालों के अनुसार, उपलब्ध जांच रिपोर्ट में मुख्य रूप से अग्नि सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का उल्लेख है, जबकि अन्य बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट की जरूरत बताई गई है। उन्होंने इस मामले में दोबारा व्यापक जांच की मांग की थी।

दो अन्य औद्योगिक मामलों की रिपोर्ट भी मांगी

धरने के दौरान मां छिन्नमस्तिका आयरन एंड सीमेंट, बरकाकाना-हेहल और झारखंड इस्पात, हेसला से जुड़े हादसों की जांच की वर्तमान स्थिति और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई को भी सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई। शंकर चौधरी ने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल रिपोर्ट तैयार करना नहीं होना चाहिए, बल्कि हादसे के कारण, सुरक्षा मानकों के पालन, जिम्मेदारी और उसके बाद की प्रशासनिक कार्रवाई भी स्पष्ट होनी चाहिए।

प्रदूषण पर प्रभावी कार्रवाई की मांग

यशवंत सिन्हा ने रामगढ़ में औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े प्रदूषण के मुद्दे पर भी कार्रवाई की मांग रखी। जिले में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर अलग से न्यायिक कार्यवाही भी हुई है। 14 सितंबर 2026 के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में रामगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी, पानी के नमूनों की दोबारा जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन समेत कई निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उपलब्ध सामग्री से संबंधित उद्योगों द्वारा लगातार वैधानिक उल्लंघन अभी स्थापित नहीं हुआ है।

धरने में प्रकाश मिश्रा, चरण केवट, कमलनाथ महतो, भगवान साव, धर्मवीर महतो, जमुना बेदिया, रमेश गोप, जलेश्वर तिवारी, राम किशुन मुंडा, महेश यादव, पारस महतो, रामेश्वर महतो, सुनील महतो और परमेश्वर महतो समेत कई लोग मौजूद रहे।

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