गिरिडीह : स्वयंसेवी संस्था जागो फाउंडेशन एवं क्राई, अमेरिका के सहयोग से उत्तिमटांड़ गांव में पोषण माह के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान संतुलित आहार, स्वच्छता, स्वास्थ्य देखभाल और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गेंदों प्रसाद वर्मा ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और बच्चों को पोषण संबंधी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। ऐसे आयोजनों के माध्यम से लोगों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पोषण और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने से लोगों में अपने खान-पान और स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ेगी। इससे बेहतर पोषण को बढ़ावा देने के साथ कुपोषण की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के सेवन पर जोर
संस्था के साथी महेंद्र दास ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में घर और आसपास आसानी से उपलब्ध हरी साग-सब्जियों तथा स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना चाहिए। उन्होंने सहजन का साग, गांधारी का साग, पपीता, गाजर और मुरई समेत अन्य खाद्य पदार्थों का उदाहरण देते हुए इनके नियमित सेवन पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनके संतुलित और पर्याप्त सेवन से शरीर को आवश्यक पोषण मिल सकता है। इसके लिए परिवारों को स्थानीय खाद्य संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
नियमित जागरूकता कार्यक्रम की जरूरत
सामुदायिक कार्यकर्ता सुक्रमणि ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पोषण को लेकर केवल एक दिन कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है। पोषण, स्वास्थ्य और संतुलित आहार के प्रति जागरूकता के लिए ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि लगातार जागरूकता अभियान चलने से अधिक से अधिक लोगों तक पोषण संबंधी जानकारी पहुंचाई जा सकती है। साथ ही कुपोषण से निपटने के लिए सामुदायिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सहिया बेबी देवी, सेविका सुष्मिता, पोषण सखी कुमारी सोनी, काजल देवी, मंजू कुमारी, रेखा कुमारी, धनेश्वरी देवी, लक्ष्मी कुमारी, साहब, वैजयंती कुमारी सहित अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।




