विलियम जैकब
गिरिडीह : जिले के सुदूरवर्ती गावां प्रखंड में इन दिनों जंगली बिरनियों के हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। आकार में छोटी दिखने वाली ये बिरनियां अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। बीते करीब 20 दिनों में इनके हमलों से 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
बिरनियों का झुंड अचानक लोगों पर हमला कर देता है। कब, कहां और किसे निशाना बनाया जाएगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। अचानक होने वाले हमले के कारण लोगों को संभलने या बचाव का मौका भी नहीं मिल पाता। यही वजह है कि जंगल से होकर गुजरने वाले ग्रामीणों में डर बढ़ गया है।
पिहरा मानपुर, खोटमनाय पहाड़ी, तिलैया जंगल, लोरिया, धनेता जंगल और तेतरियाटांड़ समेत कई इलाकों में बिरनियों के हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। दहशत का आलम यह है कि कुछ रास्तों पर लोगों ने आवागमन तक बंद कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से जंगली बिरनियों की समस्या बनी हुई है। पहले इनके हमले छिटपुट होते थे, लेकिन हाल के दिनों में झुंड के रूप में लगातार हमले होने से स्थिति गंभीर हो गई है।
गावां के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि जंगली बिरनी सामान्य बिरनी की तुलना में अधिक विषैली होती है। झुंड में हमला होने पर एनाफायलेटिक रिएक्शन हो सकता है, जिससे शरीर में सूजन और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने जैसी स्थिति पैदा होती है। ऐसे मामलों में एंटी टॉक्सिन देकर सामान्य तरीके से उपचार किया जाता है।
वहीं, रेंजर अनिल कुमार ने बताया कि बिरनियों के हमलों की जानकारी विभाग को दी गई है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। गावां के अंचलाधिकारी अभिषेक कुमार ने कहा कि बिरनियों के हमले को आपदा की श्रेणी में नहीं रखा गया है। सरकार की मौजूदा गाइडलाइन में भी इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए फिलहाल कुछ कर पाना संभव नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में असमय बदलाव और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ भी ऐसी घटनाओं के पीछे संभावित कारण हो सकते हैं। पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ मनीष कुमार ने कहा कि जंगली बिरनियां अचानक आक्रामक नहीं हुई हैं। पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या अधिक दिखाई दे रही है। उन्होंने इस पूरे मामले पर अध्ययन की जरूरत बताई।




