फतेहपुर के परिषदीय स्कूलों में रोज होगा समाचार पत्र वाचन, बढ़ेगी पढ़ने की आदत

परिषदीय विद्यालयों में रोज समाचार पत्र पढ़ने से छात्रों की भाषा, सामान्य ज्ञान, सामाजिक जागरूकता और आलोचनात्मक सोच विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

फतेहपुर : जनपद के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों के बीच पठन संस्कृति विकसित करने के लिए नई पहल को बढ़ावा दिया जा रहा है। शासन और जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स के निर्देश के क्रम में अब विद्यालयों की प्रार्थना सभा में प्रतिदिन समाचार पत्र वाचन कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ उन्हें देश-दुनिया की समसामयिक घटनाओं से जोड़ना है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रिंसी मौर्या ने बताया कि विद्यालय स्तर पर समाचार पत्र पढ़ने की आदत छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे बच्चों के भाषा कौशल में सुधार होने के साथ उनके शब्दकोश का विस्तार होता है। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की समझ बढ़ती है और उनमें सामाजिक जागरूकता तथा आलोचनात्मक चिंतन की क्षमता भी विकसित होती है।

समाचार पत्र वाचन से बच्चों की पढ़ने की गति और विषय को समझने की क्षमता में भी सुधार आने की उम्मीद है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी परिषदीय विद्यालयों से अपील की है कि कक्षा स्तर पर समाचार चर्चा सत्र भी आयोजित किए जाएं। इन सत्रों में बच्चे अपने पढ़े हुए समाचारों को साथियों के बीच साझा कर सकेंगे।

उन्होंने शिक्षकों से कहा कि विद्यार्थियों को समाचार पत्र के अलग-अलग हिस्सों से परिचित कराया जाए। इनमें मुख्य समाचार, संपादकीय, खेल, मनोरंजन और विज्ञान जैसे प्रमुख खंड शामिल हैं। इसके अलावा विद्यालयों में समाचार पत्र क्लिपिंग प्रतियोगिता और समाचार प्रस्तुति प्रतियोगिता जैसी गतिविधियां आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।

फतेहपुर में इसके साथ ही ‘प्रार्थना से ज्ञानोदय’ कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है। इसके तहत प्रार्थना सभा में प्रतिदिन अलग-अलग प्रार्थना, ‘आज का शब्द’, ‘आज का सुविचार’ और सामान्य ज्ञान से जुड़ी जानकारी दी जाती है। बच्चों को फतेहपुर जनपद के इतिहास के बारे में भी बताया जाता है।

प्रार्थना सभा के समापन पर ‘आज का सवाल’ के माध्यम से विद्यार्थियों से सवाल पूछे जाते हैं। इस गतिविधि का उद्देश्य बच्चों में जिज्ञासा, ज्ञान और नियमित रूप से नई जानकारी हासिल करने की आदत विकसित करना है। जिला स्तर पर इन गतिविधियों को सभी परिषदीय विद्यालयों में नियमित रूप से संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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