उर्दू-बांग्ला शिक्षकों की सेवा पर संकट, कारी शोहैब ने सीएम को लिखा पत्र

विधान पार्षद कारी शोहैब ने मुख्यमंत्री से उर्दू-बांग्ला स्पेशल शिक्षकों की सेवा समाप्ति पर रोक और मामले की वैधानिक समीक्षा की मांग की।

संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट

पटना : बिहार के उर्दू एवं बांग्ला स्पेशल शिक्षकों के हितों को लेकर विधान पार्षद मो. कारी शोहैब ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पत्र संख्या 2853, दिनांक 1 अक्टूबर 2026 के तहत की जा रही सेवा समाप्ति की कार्रवाई से उन शिक्षकों को अलग रखने की मांग की है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में न्यायालयीय आदेश और विभागीय निर्देशों के आधार पर वर्ष 2015-16 में हुई थी।

कारी शोहैब ने अपने पत्र में कहा है कि संबंधित शिक्षकों ने कई वर्षों तक राज्य की शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दी हैं। इनमें से अनेक शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और सक्षमता परीक्षा उत्तीर्ण कर विशिष्ट शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। वहीं कुछ शिक्षक बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से प्रधान शिक्षक और विद्यालय अध्यापक के पद पर भी नियुक्त हो चुके हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि ऐसे शिक्षकों की सेवा समाप्त होने से केवल शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि विद्यालयों में उर्दू और बांग्ला भाषा की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

विधान पार्षद ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की अलग से वैधानिक समीक्षा कराने और इसके आधार पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने संबंधित शिक्षकों को किसी भी प्रतिकूल कार्रवाई से संरक्षण देने का आग्रह किया है।

कारी शोहैब की ओर से उठाए गए इस मुद्दे का केंद्र वर्ष 2015-16 में हुई उन नियुक्तियों की स्थिति है, जो उनके मुताबिक वर्ष 2014 में शुरू हुई नियोजन प्रक्रिया की निरंतरता में न्यायालयीय आदेश और विभागीय निर्देशों के आधार पर की गई थीं। अब सेवा समाप्ति की कार्रवाई के बीच इन शिक्षकों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कारी शोहैब बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं और इससे पहले भी उर्दू एवं अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाते रहे हैं।

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