सिमडेगा I विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ में मंगलवार को प्रकृति पर्व करम पूजा के निमित्त पारंपरिक श्रद्धा और धार्मिक विधि-विधान के साथ जावा उठाया गया। वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित विद्यालय परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों से उत्सवी माहौल बना रहा। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण, कृषि संस्कृति और जैव विविधता के महत्व से अवगत कराया गया।
छात्रावास प्रमुख सुनीति कुमारी और अंजलि कुमारी के नेतृत्व में उपवास कर रही छात्राओं ने देवनदी से पवित्र बालू एकत्रित की। इसके बाद विद्यालय के आचार्य प्रमोद पानीग्राही ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत जावा रोपण का अनुष्ठान पूरा कराया। जावा में गेहूं, जौ, धान, मड़वा, गोंदली, उड़द, कुर्थी, चना और मकई समेत 12 स्थानीय अनाजों के बीजों का प्रयोग किया गया।
इन 12 प्रकार के बीजों के माध्यम से साल के 12 महीनों तक अन्न-धन की प्रचुरता, कृषि समृद्धि और जैव विविधता संरक्षण का संदेश दिया गया। जावा उठाने की रस्म पूरी होने के बाद लोकगायक गोपाल बरला की मांदर की थाप पर छात्राओं ने पारंपरिक करम नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य और गीतों से विद्यालय परिसर में करम पर्व का रंग और गहरा हो गया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि करम पर्व केवल उपवास और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनवासी समाज के समृद्ध कृषि-दर्शन और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना का प्रतीक है। जावा का प्रत्येक अंकुर यह संदेश देता है कि जिस तरह बीज की देखभाल से पौधा विकसित होता है, उसी तरह संस्कार, संस्कृति और प्रकृति का संरक्षण भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि करम पर्व लोगों को अपनी परंपराओं, कृषि जीवन और प्रकृति के साथ अपने गहरे संबंध की याद दिलाता है। विद्यालय में इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति को समझने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम के बाद अगले सात दिनों तक व्रती छात्राएं पूरी निष्ठा के साथ जावा की सेवा करेंगी। करम पूजा के दिन करम डाली स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी और इसके बाद परंपरा के अनुसार उसका विसर्जन किया जाएगा। आयोजन में विद्यालय के आचार्य, छात्र-छात्राएं एवं अन्य लोग उपस्थित रहे। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।




