कुसुम-बेर-पलाश पर लाह से बदलेगी किसानों की तकदीर, गांव पहुंचीं मंत्री

मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सिमडेगा के जंगल क्षेत्र में किसानों से संवाद कर लाह उत्पादन का जायजा लिया, 50-100 एकड़ के क्लस्टर बनाने पर दिया जोर।

सिमडेगा I झारखंड सरकार की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की मंगलवार को अपने प्रथम सिमडेगा दौरे के दौरान सीधे गांवों में पहुंचीं और जंगल क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को करीब से जाना। उन्होंने जलडेगा प्रखंड के कोनमेरला केउन्दटोली तथा ठेठईटांगर प्रखंड के कहुपानी गांव का भ्रमण कर किसानों से संवाद किया और कुसुम समेत अन्य पेड़ों पर हो रहे लाह उत्पादन की जमीनी स्थिति का जायजा लिया।

कोनमेरला पारिस मैदान के समीप आयोजित एक दिवसीय लाह प्रसंस्करण कार्यशाला में मंत्री ने किसानों की समस्याएं सुनीं। कार्यक्रम का उद्देश्य हाथी प्रभावित और जंगल क्षेत्र के किसानों को लाह उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना तथा फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक आय का मजबूत साधन तैयार करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। मंत्री ने कुसुम के पेड़ों पर लाह उत्पादन का निरीक्षण किया। कई पेड़ों पर अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने पर उन्होंने किसानों, मास्टर ट्रेनरों और विभागीय अधिकारियों से इसकी वजह पूछी।

विशेषज्ञों ने बताया कि लाह का बीहन चढ़ाने का उचित समय सामान्यतः जनवरी-फरवरी के आसपास होता है। बारिश के मौसम में बीहन चढ़ाने पर उसके झड़ने की संभावना अधिक रहती है, जिससे लाह का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसानों ने बताया कि प्रशिक्षण मिलने के बावजूद कई बार समय पर बीहन उपलब्ध नहीं हो पाता। लाह कीट के नष्ट होने और निर्धारित समय पर बीहन पेड़ों पर नहीं चढ़ा पाने से भी उत्पादन में कमी आती है।

कुछ किसानों ने बताया कि बारिश के मौसम में बेर के पेड़ों पर लाह का अच्छा उत्पादन हो रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त किसानों ने मंत्री के समक्ष बेर के पेड़ों पर लाह उत्पादन के अपने अनुभव भी साझा किए।

मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीहन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने सिमडेगा में लाह उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर और टोला आधारित योजना तैयार करने का निर्देश दिया। करीब 50 से 100 एकड़ क्षेत्र को एक क्लस्टर के रूप में विकसित कर वहां लाह के साथ बीहन उत्पादन की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजने को कहा गया।

जमीन और जंगल तभी बचेंगे, जब उनसे आमदनी होगी : मंत्री

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरकार केवल बैठकों और कार्यक्रमों तक सीमित रहकर योजनाएं नहीं बनाना चाहती। योजनाओं की वास्तविक जरूरत और उनकी कमियों को समझने के लिए अधिकारियों और विभागीय टीम को गांवों तक पहुंचना होगा। इसी उद्देश्य से वह किसानों के बीच आकर पेड़ों के नीचे बैठकर लाह उत्पादन की वास्तविक स्थिति समझ रही हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी योजना को बंद कमरे में बैठकर सफल नहीं बनाया जा सकता। गांव-घर तक पहुंचकर किसानों से बातचीत और उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना जरूरी है। झारखंड के आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तभी प्रभावी होगा, जब स्थानीय लोगों की आजीविका भी उनसे मजबूत हो।

मंत्री ने कहा कि केवल जंगल बचाने की बात करने से काम नहीं चलेगा। जंगल और पेड़ों से ग्रामीणों को आर्थिक लाभ भी मिलना चाहिए। लाह उत्पादन इस दिशा में एक बेहतर अवसर है। कुसुम, बेर और पलाश जैसे पेड़ों पर वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन कर किसान अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आम धारणा है कि पेड़ से पैसा नहीं उगता, लेकिन लाह ऐसी गतिविधि है जिसमें पेड़ पर ही आमदनी का साधन तैयार होता है। एक अच्छे पेड़ से लाह उत्पादन के जरिए करीब 24 हजार से 50 हजार रुपये तक की आय की संभावना रहती है। ऐसे में किसानों को इसे केवल पारंपरिक गतिविधि न मानकर व्यवसायिक कृषि के रूप में अपनाना चाहिए।

मंत्री ने पलायन पर चिंता जताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में ग्रामीण रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। लोग अपनी जमीन और जंगल छोड़कर बाहर मजदूरी करने को मजबूर होते हैं। सरकार की कोशिश है कि गांव में ही ऐसी आर्थिक गतिविधियां विकसित हों, जिससे लोगों को मजबूरी में पलायन न करना पड़े।

उन्होंने सिमडेगा की युवा प्रतिभा का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां की बेटी प्रतिभा ने आईआईटी खड़गपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा हासिल करने के बाद अपने ज्ञान का उपयोग क्षेत्र में भी किया है। रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में काम करने के साथ वह कुसुम, पलाश और बेर सहित अन्य पेड़ों पर लाह उत्पादन कर रही हैं तथा किसानों को प्रशिक्षण से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। मंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरणों से क्षेत्र की युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

लैम्प्स-पैक्स से जुड़ें किसान, मिलेगा प्रशिक्षण और बीहन का लाभ

मंत्री ने किसानों से लैम्प्स और पैक्स से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि संस्थागत व्यवस्था से जुड़ने पर किसानों को प्रशिक्षण, बीहन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकता है। सरकार की ओर से लाह उत्पादन के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण की व्यवस्था है।

प्रशिक्षण में पेड़ों की कटाई-छंटाई, बीहन चढ़ाने का सही समय, कीट प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन की जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षण में शामिल होने वाले किसानों को आने-जाने के खर्च के लिए यात्रा भत्ता देने की व्यवस्था भी है।

मंत्री ने कहा कि मौसम और पर्यावरण में लगातार बदलाव हो रहा है। इसलिए केवल वर्षों पुरानी पारंपरिक जानकारी के आधार पर खेती करना पर्याप्त नहीं है। किसानों को वैज्ञानिक पद्धति और आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी है। सही समय पर प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण बीहन उपलब्ध होने से उत्पादन के साथ किसानों की आय भी बढ़ सकती है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिमडेगा में लाह उत्पादन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान कर क्लस्टर आधारित योजना तैयार की जाए। 50 से 100 एकड़ क्षेत्र में एक साथ लाह उत्पादन और बीहन उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में काम हो। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ बीहन बांटना नहीं, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक किसानों को मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच रहा है तो इसकी वजह समझना भी सरकार की जिम्मेदारी है। किसानों को भी आगे बढ़कर योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।

मंत्री ने किसानों से जमीन खाली नहीं छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि खाली जमीन पर अतिक्रमण और विवाद का खतरा बढ़ सकता है। खेती, बागवानी, लाह उत्पादन या अन्य उत्पादक गतिविधियों के माध्यम से जमीन का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने फर्जी दस्तावेज और गलत वंशावली के जरिए जमीन पर दावा करने वालों से भी ग्रामीणों को सतर्क रहने को कहा।

कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को टपक सिंचाई, किसान समृद्धि योजना सहित अन्य योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया गया। गांव स्तर पर गोष्ठियां आयोजित कर पात्र किसानों को आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया।

हाथियों से परेशान किसानों के लिए लाह बनेगा आय का वैकल्पिक आधार : विधायक

कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोनगाड़ी ने कहा कि कोनमेरला क्षेत्र हाथियों से प्रभावित इलाकों में शामिल है। हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के कारण किसान जंगल क्षेत्र में खेती करने से बच रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी कृषि और पारिवारिक आय पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कुसुम, पलाश और बेर जैसे अनेक पेड़ उपलब्ध हैं, जिन पर लाह उत्पादन किया जा सकता है। यदि किसानों को व्यवस्थित तरीके से लाह उत्पादन से जोड़ा जाए तो फसल नुकसान की भरपाई के साथ परिवार की आय भी बढ़ाई जा सकती है।

विधायक ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में तथा व्यक्तिगत रूप से मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के समक्ष सिमडेगा के किसानों की समस्या रखी थी। मंत्री ने लाह उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सिमडेगा जिले को पर्याप्त मात्रा में लाह उपलब्ध कराया जा रहा है। लाह कीट और बीहन उत्पादन के लिए विभिन्न स्थानों पर नर्सरी तैयार करने की व्यवस्था भी की जा रही है।

विधायक ने मंत्री के गांव पहुंचकर किसानों से सीधे संवाद करने और पेड़ों के नीचे जाकर उत्पादन की स्थिति देखने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसकी सही जानकारी जमीन पर जाकर ही मिल सकती है।

वन उपज के लिए संगठन बनाकर बढ़ाएं आमदनी

कार्यशाला में विभागीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध वन उपज की संभावनाओं के बारे में किसानों को जानकारी दी। करंज, लाह, महुआ, कुसुम और साल बीज सहित विभिन्न वन उत्पादों के संग्रह, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ाव के बारे में बताया गया।

अधिकारियों ने किसानों को व्यक्तिगत रूप से उत्पाद बेचने के बजाय संगठन बनाकर सामूहिक रूप से वन उपज का संग्रह करने की सलाह दी। लैम्प्स-पैक्स और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से इन उत्पादों की खरीद की व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई। इससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।

किसानों से संवाद के आधार पर बनेगी आगे की कार्ययोजना

मंत्री ने कोनमेरला केउन्दटोली में किसानों के साथ बैठकर खेती, लाह उत्पादन, सिंचाई, बीहन की उपलब्धता, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने किसानों से यह भी जाना कि योजनाओं का लाभ लेने में उन्हें किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उत्पादन बढ़ाने के लिए किन सुविधाओं की जरूरत है।

मंत्री ने कहा कि किसानों की समस्याओं और सुझावों को ध्यान में रखकर ही आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन, समय पर बीहन उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण बढ़ाने और किसानों को संस्थागत व्यवस्था से जोड़ने को प्राथमिकता दी जाएगी।

किसानों के बीच उपकरण और सामग्री का वितरण

कहुपानी में आयोजित कार्यशाला के दौरान जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से मत्स्य कृषकों के बीच मछली कटिंग टूल किट वितरित की गई। एक किसान को टाटा मैजिक मालवाहक वाहन दिया गया। कृषि विभाग की ओर से दो सोलर पैनल मोटर पंप भी किसानों को उपलब्ध कराए गए।

कार्यक्रम में जेएसएलपीएस की दीदियों और स्कूली बच्चियों ने गीत प्रस्तुत कर मंत्री का स्वागत किया। मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, अग्रणी बैंक प्रबंधक सहित जिला और रांची से पहुंचे कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के पदाधिकारी, विशेषज्ञ तथा अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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