मनीष सिन्हा
रांची/धनबाद, भारत — झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में सचेतक सह धनबाद विधायक राज सिन्हा ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई लंबित और गंभीर मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति, समयबद्ध कार्रवाई और विद्यार्थियों, युवाओं तथा शिक्षकों के हित में ठोस फैसले लेने की मांग की।
राज सिन्हा ने कहा कि राज्य में विद्यालयों का उन्नयन तो किया जा रहा है, लेकिन उसके अनुरूप शिक्षकों के पदों का सृजन और पदस्थापन नहीं होने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई उच्च विद्यालयों को +2 विद्यालयों में उत्क्रमित किए जाने के बावजूद आवश्यक शिक्षक पदों का सृजन और नियुक्ति नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने सरकार से उत्क्रमित +2 विद्यालयों में आवश्यकता के अनुसार नए शिक्षक पदों का सृजन कर जल्द नियुक्ति और पदस्थापन की मांग की।
334 अभ्यर्थियों की नियुक्ति में देरी पर सवाल
विधायक ने वर्ष 2023 की स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े 334 अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया लंबित रहने का मुद्दा भी विधानसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि प्रमाण-पत्र सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्ति में देरी से उन युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में है, जो लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
राज सिन्हा ने सरकार से संबंधित चयन प्रक्रिया को तत्काल आगे बढ़ाकर योग्य 334 अभ्यर्थियों को शीघ्र नियुक्ति पत्र देने की मांग की। उनका कहना है कि इससे युवाओं को रोजगार मिलने के साथ विद्यालयों को भी आवश्यक शिक्षक उपलब्ध हो सकेंगे।
उत्क्रमित +2 स्कूलों में विषयवार शिक्षक नियुक्त करने की मांग
धनबाद विधायक ने कहा कि केवल उच्च विद्यालयों को +2 विद्यालयों में उत्क्रमित कर देना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता भी जरूरी है।
उन्होंने सरकार से उत्क्रमित विद्यालयों में आवश्यकता के अनुसार माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के पद सृजित कर नियमित नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने तथा शिक्षकों का पदस्थापन सुनिश्चित करने की मांग की।
कोयलांचल के BEd शिक्षकों और कर्मियों की समस्याएं उठाईं
राज सिन्हा ने विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद के अंतर्गत आने वाले BEd महाविद्यालयों से जुड़े शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की समस्याओं को भी विधानसभा में उठाया।
उन्होंने कहा कि कोयलांचल क्षेत्र के BEd संस्थानों में वर्षों से पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है, लेकिन शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और अन्य सेवा सुविधाओं को लेकर गंभीर विसंगतियां बनी हुई हैं।
उन्होंने संबंधित महाविद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों के हितों की रक्षा करते हुए समान एवं सम्मानजनक सेवा शर्तें, वेतनमान, EPF तथा अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की।
BEd विद्यार्थियों की फीस में अंतर खत्म करने की मांग
विधायक ने विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय और संबंधित महाविद्यालयों में संचालित BEd पाठ्यक्रम की फीस में अंतर का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि एक ही प्रकार के व्यावसायिक पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों से अलग-अलग शुल्क लिया जाना आर्थिक बोझ और असमानता का कारण बन रहा है। उन्होंने सरकार और विश्वविद्यालय स्तर पर पहल कर BEd पाठ्यक्रम की फीस में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने तथा विद्यार्थियों के हित में समान और तर्कसंगत शुल्क व्यवस्था लागू करने की मांग की।
‘शिक्षा व्यवस्था को घोषणाओं नहीं, ठोस फैसलों की जरूरत’
राज सिन्हा ने कहा कि झारखंड के विद्यार्थियों और युवाओं का भविष्य प्रशासनिक लापरवाही या फैसलों में देरी का शिकार नहीं होना चाहिए। विद्यालयों का उत्क्रमण, शिक्षकों की नियुक्ति, प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों का भविष्य और उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के अधिकारों पर सरकार को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करना होगा।
उन्होंने सरकार से 334 अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया तत्काल पूरी करने, उत्क्रमित +2 विद्यालयों में शिक्षक पदों का सृजन करने, विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदस्थापन सुनिश्चित करने तथा BEd शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों की सेवा संबंधी विसंगतियां दूर करने की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने वेतन, EPF और अन्य सेवा सुविधाएं सुनिश्चित करने, BEd विद्यार्थियों की फीस में असमानता खत्म करने तथा राज्य में लंबित शिक्षक नियुक्तियों और पद सृजन की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया।
राज सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि झारखंड के युवाओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों के अधिकारों के लिए विधानसभा से लेकर सड़क तक उनकी आवाज मजबूती से उठती रहेगी।




