रूपेश अग्रवाल -:
बालूमाथ I कोयला खदानों से निकलने वाले हाइवा और ट्रकों की लगातार आवाजाही ने बालूमाथ के ग्रामीणों और दुकानदारों की परेशानी बढ़ा दी है। NH-22 पर दिन-रात भारी वाहनों के परिचालन से जहां सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गई है, वहीं सड़क पर गिरे कोयले की डस्ट वाहनों के गुजरते ही हवा में उड़कर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। ग्रामीणों का कहना है कि धूल के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है और राहगीरों, बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से बालूमाथ शहर में दिन के समय भारी कोयला वाहनों के परिचालन पर नो एंट्री लगाने तथा कोयला ढुलाई के लिए बाईपास सड़क बनाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज रफ्तार से बाजार क्षेत्र में दुर्घटना का खतरा भी लगातार बना रहता है। धूल की सबसे ज्यादा मार सड़क किनारे दुकान लगाने वाले कारोबारियों को झेलनी पड़ रही है।
धूल, धुआं और प्रेशर हॉर्न से बढ़ी परेशानी
बालूमाथ में भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर लोगों में लंबे समय से नाराजगी है। दिनभर ट्रांसपोर्ट वाहनों के गुजरने से जाम, दुर्घटना की आशंका, धूल-धुआं और प्रेशर हॉर्न की आवाज से लोग परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार दिन के समय नो एंट्री लागू करने की मांग की गई, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने विधायक प्रकाश राम के जनता दरबार में भी जाम और भारी वाहनों से मुक्ति की मांग उठाई थी। इसके बाद विधायक ने प्रस्ताव तैयार कर अनुमंडल पदाधिकारी को भेजने का निर्देश दिया था, ताकि स्कूल के समय और बाजार के दिनों में नो एंट्री लागू की जा सके। ग्रामीणों का दावा है कि प्रस्ताव भेजे करीब आठ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई।
तीन बड़ी खदानों से 24 घंटे निकलते हैं वाहन
लातेहार जिले में संचालित मगध कोल परियोजना, तेतरिया खांड और तुबेद कोल माइंस से सैकड़ों कोयला लदे वाहनों का आवागमन बालूमाथ मुख्य शहर से होता है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार भारी वाहनों के परिचालन के बावजूद सड़क के रखरखाव और सफाई पर सीसीएल तथा ट्रांसपोर्ट कंपनियों की ओर से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। वहीं वाहनों से गिरने वाली कोयला डस्ट के कारण धूल उड़ती रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि वाहनों के गुजरने के दौरान धूल के फव्वारे उठते हैं, जिससे सड़क किनारे रहने और कारोबार करने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है।
स्कूल जाने वाले बच्चों पर भी खतरा
बालूमाथ मुख्यालय क्षेत्र में दर्जनों सरकारी और गैर सरकारी विद्यालय संचालित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, हजारों बच्चे रोजाना पैदल स्कूल आते-जाते हैं। भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल सीधे उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा तेज रफ्तार वाहनों के कारण विद्यार्थियों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
स्थानीय विद्यार्थियों का कहना है कि कई बार सड़क पर इतनी धूल उड़ती है कि सामने का रास्ता तक स्पष्ट दिखाई नहीं देता। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सामने से कौन सा वाहन आ रहा है। इससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने रखीं पांच मांगें
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से NH-22 की स्थिति और लगातार खराब हो रही सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा सड़क पर गिरी कोयला डस्ट की नियमित सफाई, ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई और सभी कोयला वाहनों को तिरपाल से ढककर परिवहन कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने धूल प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की आंखों और फेफड़ों की जांच कराने तथा भारी वाहनों के लिए बालूमाथ शहर से अलग बाईपास मार्ग की व्यवस्था करने की भी मांग रखी है।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास और कोयला परिवहन जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत आम लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य से नहीं चुकाई जानी चाहिए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को आवेदन देकर जल्द कार्रवाई की मांग की है। अब लोगों की नजर प्रशासन की पहल पर है। कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों के बड़े आंदोलन की आशंका भी जताई जा रही है।




