बानो I कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बानो प्रखंड ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित कुपोषण उपचार केंद्र में स्वास्थ्यकर्मियों और आंगनवाड़ी सेविकाओं के समन्वित प्रयास से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें 15 दिनों तक भर्ती कर उपचार और फॉलोअप की व्यवस्था की जा रही है। समय पर इलाज और पौष्टिक आहार मिलने से कई बच्चों की शारीरिक स्थिति में सुधार आया है।
झारखंड सरकार की पोषण संबंधी योजनाओं तथा जिला प्रशासन, सिमडेगा के मार्गदर्शन और सहयोग से कुपोषण के खिलाफ अभियान को लगातार मजबूती मिल रही है। बानो में स्वास्थ्य विभाग और आंगनवाड़ी सेविकाओं की टीम बच्चों तक पहुंचकर उनकी स्थिति की निगरानी कर रही है।
प्रत्येक सप्ताह गुरुवार और शनिवार को ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस का आयोजन किया जाता है। इस दौरान आंगनवाड़ी सेविका, सहिया, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी और एएनएम द्वारा 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की जाती है। जांच के दौरान कुपोषित पाए जाने वाले बच्चों को आवश्यक उपचार के लिए कुपोषण उपचार केंद्र भेजा जाता है।
सितंबर 2026 में आदर्श जोजो, इशांत जोजो, अनान्य सुरीन और सुष्मीता जोजो सहित अन्य कुपोषित बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक दवाइयां, एफ-100, टीएफ और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया। उपचार और नियमित देखभाल के बाद इन बच्चों की शारीरिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानो के कुपोषण उपचार केंद्र में कुल 157 कुपोषित बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें डिस्चार्ज किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त माह तक 127 बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मनोरंजन कुमार और डॉ. कमलेश उरांव ने बताया कि कुपोषण से निपटने के लिए बच्चों की समय पर पहचान, उचित उपचार और लगातार देखभाल बेहद जरूरी है। सामुदायिक स्तर पर जागरूकता और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से कुपोषण पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकता है।
बानो की यह उपलब्धि स्वास्थ्यकर्मियों, आंगनवाड़ी सेविकाओं और समुदाय के समन्वित प्रयास को दर्शाती है। अभियान का उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालकर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर ले जाना है, ताकि उनका शारीरिक विकास बेहतर हो और वे मजबूत भविष्य की नींव बन सकें।




