रांची, (झारखंड) — खूंटी जिले में जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं में कथित अनियमितता और बिना काम किए सरकारी राशि के भुगतान का मामला सामने आया है। झारखंड छात्र संघ ने इस मामले में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो से दोषी अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संघ का आरोप है कि कई गांवों में योजनाओं का काम अधूरा रहने के बावजूद विभागीय दस्तावेजों और पोर्टल पर उन्हें पूर्ण दिखाकर सरकारी राशि का भुगतान कर दिया गया। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
झारखंड छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने 3 नवंबर 2026 को कांके स्थित विश्वा सभागार में मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो को मांग पत्र सौंपा। मंत्री वहां जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की समीक्षा बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष एस अली ने मंत्री को बताया कि वर्ष 2022-23 में खूंटी जिले के विभिन्न गांवों में आदिवासी समुदाय के लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजनाएं शुरू की गई थीं, लेकिन कई स्थानों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप काम नहीं हुआ।
82 योजनाओं में केवल 7 पूरी होने का दावा
एस अली ने खूंटी प्रखंड की लांदुप पंचायत के क्लस्टर-8B का उदाहरण देते हुए बताया कि इस क्लस्टर के अंतर्गत विभिन्न गांवों में कुल 82 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं स्वीकृत की गई थीं। इनमें चोनदोरो, दाखिला, दुल्ली/दुलमी, जोजोहातु, करेटुमडीह, किर्रा, कटुद, लांदुप, लोटोर, नचितोला, पात्रा टोली, पीरीहातु, रंगरूम, रंगाडीह, सिरलेम और उतरांग शामिल हैं।
संघ के अनुसार, विभागीय फाइलों और आधिकारिक पोर्टल पर 38 योजनाओं को पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि वास्तविकता में केवल 7 योजनाएं ही पूरी हुई हैं। इसके अलावा 8 योजनाओं में पहुंच पथ (Approach Path) तक का निर्माण नहीं किया गया, जिससे संबंधित संरचनाएं अनुपयोगी बनी हुई हैं। शेष 67 योजनाओं को अधूरा बताया गया है।
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि इन अधूरी योजनाओं के बावजूद संबंधित एजेंसी को करीब 3.50 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। एस अली ने बताया कि इसी तरह की कथित अनियमितताएं खूंटी जिले के क्लस्टर-8A, 9A, 9B, 10A, 10B और 11A की ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं में भी हुई हैं।
अधिकारियों और संवेदकों पर मिलीभगत का आरोप
झारखंड छात्र संघ ने तत्कालीन विभागीय कनीय अभियंता रामजी प्रसाद, सहायक अभियंता राम सुंदर राम, कार्यपालक अभियंता सुरेन्द्र कुमार दिनकर तथा संबंधित एजेंसियों के संचालक सरोज नारायण प्रसाद सिंह और समीर सौरव पर अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप लगाया है।
एस अली का कहना है कि नियमानुसार किसी भी योजना का काम पूरा होने के बाद थर्ड पार्टी निरीक्षण (TPIA) और जमीनी सत्यापन कराया जाना जरूरी है। इसके बाद ही संवेदकों को भुगतान किया जाना चाहिए। लेकिन आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए अधूरे कार्यों के लिए पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किए और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी।
मंत्री ने दिया कार्रवाई का भरोसा
प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, योजनाओं का भौतिक सत्यापन करने और कथित अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों एवं संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल में रंजीत उरांव, विकास होरो, झारखंड छात्र संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष मो. फुरकान, आमया संगठन के केंद्रीय संगठन प्रभारी जियाउद्दीन अंसारी, गुलजार खान, मो. आसिफ, सरफराज सामी, अबु रेहान, मजीद आलम, इस्राइल अंसारी, इमरान जिलानी और सुरेश मुंडा सहित अन्य लोग शामिल थे।



