विलियम जैकब
गिरिडीह : झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक बेहद दुखद संयोग चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में अब तक चार मंत्रियों का निधन हो चुका है। इनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू शामिल हैं। खास बात यह है कि इन चार मंत्रियों में से तीन का शिक्षा विभाग से सीधा जुड़ाव रहा।
हाजी हुसैन अंसारी का निधन वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद हुआ था। इसके बाद शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले जगरनाथ महतो का वर्ष 2023 में इलाज के दौरान निधन हो गया। बाद में रामदास सोरेन को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिली, लेकिन वर्ष 2025 में इलाज के दौरान उनका भी निधन हो गया। अब 6 सितंबर 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन ने इस दुखद सिलसिले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन घटनाओं के बीच किसी विशेष कारण या संबंध का कोई दावा नहीं किया जा रहा है। यह केवल अलग-अलग समय पर हुई दुखद घटनाओं का एक संयोग है।
जगरनाथ महतो के निधन से पहले हुआ था आंदोलन
बताया जाता है कि जब स्वर्गीय जगरनाथ महतो शिक्षा मंत्री थे, उस दौरान आंगनबाड़ी की पोषण सखियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन और अनशन किया था। आंदोलन के दौरान मंत्री जगरनाथ महतो ने हस्तक्षेप करते हुए अनशन समाप्त कराने में भूमिका निभाई थी।
इसके कुछ समय बाद ही उनके स्वास्थ्य में गंभीर समस्या आई और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी रामदास सोरेन को दी गई।
रामदास सोरेन का भी इलाज के दौरान निधन
रामदास सोरेन ने शिक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली, लेकिन उनका कार्यकाल लंबा नहीं रहा। वर्ष 2025 में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बाद दिल्ली में उनका इलाज चला, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
इसके बाद शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सुदिव्य कुमार सोनू को मिली। उन्होंने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला और विभागीय जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से फिर चर्चा में आया संयोग
सुदिव्य कुमार सोनू का कार्यकाल भी चल ही रहा था कि 6 सितंबर 2026 को उनके आकस्मिक निधन की खबर सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े मंत्रियों के लगातार निधन का यह संयोग लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इसे लेकर तरह-तरह की बातें और कयास लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इन घटनाओं के बीच किसी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या प्रशासनिक कारण की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय इसे फिलहाल एक बेहद दुखद संयोग के रूप में ही देखा जाना उचित है।
झारखंड के लिए लगातार सामने आईं दुखद खबरें
मंत्रियों के निधन की इन घटनाओं ने झारखंड की राजनीति को लगातार झकझोरा है। अलग-अलग समय पर हुई इन मौतों से राजनीतिक दलों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच शोक की स्थिति बनी।
वजह चाहे जो भी हो, इन जनप्रतिनिधियों का असामयिक निधन झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लिए निश्चित रूप से एक बड़ी क्षति है। उनके समर्थक और राजनीतिक सहयोगी अब उनके सार्वजनिक जीवन, संघर्ष और योगदान को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।




