घने जंगल में शिक्षा की मिसाल बना गिरिडीह का आदिवासी विद्यालय आज

वायरल वीडियो में स्कूल बंद होने के दावे की पड़ताल में विद्यालय खुला मिला, जहां आदिवासी बच्चे नियमित पढ़ाई और सरकारी योजनाओं का लाभ लेते दिखे।

विलियम जैकब

गिरिडीह : जिले के सबसे अंतिम छोर पर घने जंगलों के बीच स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय शिक्षा की एक सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहा है। आदिवासी बहुल और पिछड़े माने जाने वाले इस इलाके में शिक्षक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया जा रहा था कि जंगली क्षेत्र में स्थित इस विद्यालय में अक्सर ताला लटका रहता है और बच्चों की पढ़ाई नहीं होती। वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए साधना न्यूज़ की टीम जब विद्यालय पहुंची, तो वहां की स्थिति इससे बिल्कुल अलग नजर आई।

विद्यालय खुला हुआ था और कक्षाओं में आदिवासी समुदाय के बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई करते मिले। प्रभारी प्रधानाध्यापक पंकज कुमार पांडे और सहायक शिक्षक अनिल कुमार बच्चों को पढ़ाते हुए नजर आए। शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।

विद्यालय में बच्चों को मध्याह्न भोजन के साथ पुस्तक, बैग, कॉपी सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी नियमित रूप से मिल रहा है। बच्चों से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्हें रोजाना भोजन मिलता है और शिक्षक मन लगाकर पढ़ाते हैं।

प्रभारी प्रधानाध्यापक पंकज कुमार पांडे ने साधना न्यूज़ से कहा, “यह जंगली इलाके का विद्यालय है, इसके बावजूद हमारा निरंतर प्रयास रहता है कि एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। आदिवासी और पिछड़ा इलाका होने के बावजूद हम चाहते हैं कि इन बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, ताकि ये भविष्य में कुछ बेहतर कर सकें और मुख्यधारा से जुड़ सकें।”

दुर्गम जंगल, सीमित संसाधनों और तमाम चुनौतियों के बीच शिक्षकों का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। विद्यालय में बच्चों की मौजूदगी और नियमित पढ़ाई यह दिखाती है कि इच्छाशक्ति के साथ शिक्षा की रोशनी दूर-दराज के इलाकों तक भी पहुंचाई जा सकती है।

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