तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर, डुमरी में 60 से अधिक किसानों ने लिया प्रशिक्षण

NMEO-OS योजना के तहत डुमरी के कसमाकुरहा में प्रशिक्षण, किसानों को वैज्ञानिक खेती, बीज उपचार, पोषक तत्व प्रबंधन और बाजार संपर्क की जानकारी दी गई।

 

गिरिडीह : तिलहन फसलों की उन्नत खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डुमरी प्रखंड के चैनपुर पंचायत अंतर्गत कसमाकुरहा गांव में NMEO–Oil Seeds (NMEO–OS) योजना के तहत किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी रंजीत कुमार मंडल ने किया। प्रशिक्षण में FPO से जुड़े 60 से अधिक किसान और महिला किसानों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी रंजीत कुमार मंडल ने किसानों को तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक कृषि तकनीक और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की जरूरत है। उन्होंने किसानों से तिलहन की खेती को अपनी कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने तथा सरकार की उपलब्ध कृषि योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।

इस अवसर पर रुद्रा फाउंडेशन के सचिव सैयद सबिह अशरफ ने कहा कि तिलहन की खेती किसानों के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ अतिरिक्त आय और बेहतर बाजार अवसर का माध्यम बन सकती है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के साथ सामूहिक उत्पादन और विपणन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसान FPO के माध्यम से बाजार से जुड़कर अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

सैयद सबिह अशरफ ने कहा कि रुद्रा फाउंडेशन किसानों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने तथा उन्हें उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार सहयोग करता रहेगा। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में मिली जानकारी को खेतों में अपनाने और सामूहिक रूप से कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने की अपील की।

कार्यक्रम में पारसनाथ FPCL के निदेशक उत्तिम चंद महतो सहित FPO से जुड़े 60 से अधिक किसान और महिला किसान मौजूद रहीं। महिला किसानों में अंजू देवी और बीना देवी समेत अन्य किसानों की सक्रिय सहभागिता रही।

प्रशिक्षण के दौरान संतोष कुमार और शंकर राय ने किसानों को तिलहन फसलों की वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती की जानकारी दी। किसानों को बीज उपचार, मिट्टी की गुणवत्ता एवं पोषक तत्व प्रबंधन, कीट और रोग नियंत्रण, सिंचाई, कटाई तथा Post-Harvest Management की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

इसके अलावा किसानों को FPO के माध्यम से बाजार से जुड़ने, सामूहिक विपणन और अपनी उपज के बेहतर मूल्य प्राप्त करने के तरीकों के बारे में भी बताया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और तकनीकी पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की।

 

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