विश्व आदिवासी दिवस पर धनबाद में भव्य शोभायात्रा, मांदर की थाप पर झूमा शहर

विश्व आदिवासी दिवस पर धनबाद में सोनोत संताल समाज ने भव्य शोभायात्रा निकाली। पारंपरिक वेशभूषा, मांदर और सामूहिक नृत्य ने शहर में उत्सव का माहौल बना दिया।

मनीष सिन्हा

धनबाद : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला परिषद मैदान में सोनोत संताल समाज की ओर से भव्य शोभायात्रा सह पारंपरिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन में धनबाद जिले के विभिन्न आदिवासी संगठन और समूह शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा और मांदर, ढाक, नगाड़ा व बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश की।

कार्यक्रम की शुरुआत जिला परिषद कार्यालय परिसर से हुई, जहां से विशाल शोभायात्रा निकाली गई। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए शोभायात्रा रणधीर वर्मा चौक पहुंची। इस दौरान पारंपरिक परिधानों में सजे महिला-पुरुषों ने सामूहिक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। नृत्य और वाद्ययंत्रों की गूंज से शहर का माहौल उत्सवमय हो गया।

रणधीर वर्मा चौक पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद शोभायात्रा वापस जिला परिषद मैदान पहुंची। यहां मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सोनोत संताल समाज के केंद्रीय कोषाध्यक्ष रतिलाल टुडू और संरक्षक रमेश टुडू भी मांदर की थाप पर थिरकते नजर आए। उनके उत्साह से कार्यक्रम में मौजूद लोगों का जोश और बढ़ गया और पूरा मैदान पारंपरिक संगीत व नृत्य से गूंज उठा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपराओं, रीति-रिवाज और पारंपरिक जीवन-पद्धति के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

वक्ताओं ने कहा, “आदिवासी बचेगा, तभी मानव जाति बचेगी।” उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय का प्रकृति, जंगल और पर्यावरण के साथ सदियों पुराना गहरा संबंध रहा है। विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की पहचान, अधिकारों, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।

कार्यक्रम के अंत में आदिवासी अधिकारों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और अपनी भाषा, संस्कृति व समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया। वक्ताओं ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल परंपराओं को जीवित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समुदाय की पहचान और अधिकारों से भी जुड़ा विषय है।

आयोजन में सोनोत संताल समाज के संरक्षक रमेश टुडू, केंद्रीय अध्यक्ष सनातन सोरेन, केंद्रीय सचिव अनिल टुडू, केंद्रीय कोषाध्यक्ष रतिलाल टुडू, लक्ष्मी मुर्मू, गोपीन टुडू, संजय सोरेन, लखिंदर हांसदा, मनमोहन टुडू, लखनलाल टुडू, हराधन मरांडी, हेमंत सोरेन, नरेश टुडू, महावीर हांसदा, गुरुचरण बास्की, दिव्या भास्कर, हिरामणी देवी और रामकुमार सोरेन समेत बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और आदिवासी समुदाय के लोग मौजूद रहे।

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