गिरिडीह : कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम और लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यवहार न्यायालय गिरिडीह परिसर में पॉश कानून एवं कार्यस्थल पर लैंगिक संवेदनशीलता और चुनौतियों से निपटने की रणनीति विषय पर सेमिनार सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार गिरिडीह मार्तंड प्रताप मिश्रा, प्रधान जिला कुटुंब न्यायालय संतोष कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कंवलजीत चोपड़ा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम रवि शंकर मिश्रा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम प्रीति कुमारी, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रकाश सहाय एवं सचिव चुन्नूकांत ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट की वरीय अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने पॉश कानून के विभिन्न प्रावधानों, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम तथा शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कानून के प्रावधानों को समझने और कार्यस्थल पर उनके प्रभावी अनुपालन की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मार्तंड प्रताप मिश्रा ने कहा कि पॉश कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी संबंधित पक्षों का साझा प्रयास और जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां हर महिला स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सहज महसूस कर सके। इसके लिए कानून की जानकारी के साथ-साथ लैंगिक संवेदनशीलता को व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सफदर अली नैयर समेत मंच पर मौजूद अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी स्मृति त्रिपाठी ने किया।
सेमिनार में गिरिडीह न्यायमंडल के न्यायिक पदाधिकारी, जिला अधिवक्ता संघ के अधिवक्ता, व्यवहार न्यायालय के कर्मचारी तथा पारा लीगल वॉलिंटियर्स शामिल हुए। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को पॉश कानून के प्रावधानों और कार्यस्थल पर लैंगिक संवेदनशीलता बनाए रखने के उपायों के प्रति जागरूक किया गया।




