रांची : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर रातू क्षेत्र में प्रशासनिक स्तर पर कथित अव्यवस्था और स्पष्ट जानकारी के अभाव का मामला सामने आया है। झारखंड छात्र संघ एवं आम्या के प्रखण्ड अध्यक्ष अब्दुल बारीक ने रातू अंचल प्रशासन पर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े निर्देशों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की है।
संगठनों का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर आम लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से वंशावली सत्यापन को लेकर आवेदकों को अलग-अलग स्तर पर भेजे जाने की शिकायत की गई है। हालांकि, निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में SIR के अलग-अलग चरणों के लिए निर्धारित प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की गई है। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR का उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर न रखना और अपात्र व्यक्तियों को शामिल होने से रोकना है।
वंशावली सत्यापन को लेकर उठे सवाल
अब्दुल बारीक ने आरोप लगाया कि वंशावली सत्यापन के लिए अंचल कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को कथित रूप से मुखिया या वार्ड पार्षद के पास भेजा जा रहा है। संगठन का कहना है कि इससे आवेदकों में यह असमंजस पैदा हो रहा है कि उन्हें निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करना है या स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों द्वारा बताई जा रही प्रक्रिया अपनानी है।
संगठनों ने मांग की है कि वंशावली अथवा अन्य दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका और स्वीकार्य दस्तावेजों के संबंध में स्पष्ट लिखित निर्देश सार्वजनिक किए जाएं, ताकि आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
निर्वाचन आयोग के वर्तमान SIR पोर्टल पर मतदाता पिछले SIR की मतदाता सूची में अपना नाम खोज सकते हैं। आयोग ने मतदाता सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन, नाम खोजने और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं।
अधिकारियों से संपर्क नहीं होने का आरोप
झारखंड छात्र संघ और आम्या ने आरोप लगाया कि अंचल कार्यालय में अधिकारियों की उपलब्धता को लेकर भी लोगों को परेशानी हो रही है। संगठन का दावा है कि ‘फील्ड विजिट’ के कारण अधिकारियों के कार्यालय में नहीं मिलने और फोन पर संपर्क नहीं हो पाने से आम नागरिकों को अपनी समस्याएं रखने में कठिनाई हो रही है।
संगठन ने मांग की है कि SIR की अवधि में संबंधित अधिकारियों के कार्यालय में उपलब्ध रहने का समय सार्वजनिक किया जाए तथा नागरिकों की शिकायतों और सवालों के लिए प्रभावी संपर्क व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विशेष शिविरों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
संगठनों ने गांव, टोला, पंचायत और स्कूल स्तर पर आयोजित किए जाने वाले विशेष शिविरों की तिथि, समय और स्थान की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि यदि शिविरों की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी, तो ग्रामीण और अन्य मतदाता निर्धारित स्थान पर पहुंचकर अपनी समस्याओं का समाधान करा सकेंगे।
पारिवारिक सूची तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की मांग की गई है। संगठन के अनुसार, स्पष्ट जानकारी के अभाव में लोग दस्तावेज और प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं।
चार प्रमुख मांगें रखीं
झारखंड छात्र संघ और आम्या ने निर्वाचन आयोग तथा स्थानीय प्रशासन से वंशावली सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट लिखित निर्देश जारी करने, अधिकारियों की उपलब्धता और संचार व्यवस्था सुनिश्चित करने, विशेष शिविरों की सार्वजनिक रोस्टर सूची जारी करने तथा SIR से संबंधित नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की मांग की है।
संगठनों ने यह भी मांग की कि यदि जांच में किसी कर्मचारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी या नागरिकों को गलत जानकारी देकर लौटाने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी SIR व्यवस्था में मतदाताओं के लिए ऑनलाइन सेवाएं भी उपलब्ध हैं। आयोग के पोर्टल पर SIR-2026 के तहत पिछले SIR की मतदाता सूची में नाम खोजने तथा संबंधित दस्तावेज जमा करने की सुविधाएं दी गई हैं।



