धनबाद के अहान सिंह ने CDS-2 परीक्षा में लहराया परचम, ऑल इंडिया 189वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान

पिता के निधन के सदमे के बीच नहीं टूटा हौसला, OTA चेन्नई के लिए हुआ चयन

मनीष सिन्हा

धनबाद। कोयलांचल धनबाद के झारखंड मैदान, हीरापुर निवासी अहान सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा (CDS-2) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। अहान ने अपने पहले प्रयास में SSB की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी करते हुए ऑल इंडिया 189वीं रैंक (AIR-189) हासिल की है। उनका चयन देश की प्रतिष्ठित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई के लिए हुआ है।

अहान की इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ पूरे धनबाद में खुशी का माहौल है। हालांकि सफलता तक पहुंचने का उनका सफर चुनौतियों और संघर्षों से भरा रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने NCC के माध्यम से देश सेवा का रास्ता चुना था।

अहान की जिंदगी में उस समय बड़ा दुखद मोड़ आया, जब वह अपना पहला SSB इंटरव्यू देने के लिए 25 दिसंबर को पहुंचे थे। इसी दौरान उन्हें अपने पिता के निधन की दुखद खबर मिली। पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उन्हें SSB चयन प्रक्रिया बीच में ही छोड़कर घर लौटना पड़ा।

पिता के निधन के गहरे सदमे के बावजूद अहान ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पिता के देश सेवा से जुड़े सपने को अपनी ताकत बनाया और दोबारा पूरी मेहनत के साथ परीक्षा एवं SSB की प्रक्रिया पूरी की। दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और लगातार मेहनत के बल पर उन्होंने मेरिट सूची में स्थान बनाकर OTA चेन्नई में प्रशिक्षण के लिए अपनी जगह सुनिश्चित की।

अपनी सफलता पर अहान सिंह ने कहा कि उन्होंने भारतीय सेना को अपनी पहली पसंद के रूप में चुना था और हासिल रैंक के आधार पर उनका चयन OTA चेन्नई के लिए हुआ है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने दिवंगत पिता को देते हुए कहा कि पिता ने उन्हें देश सेवा के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने अपनी मां, छोटे भाई, मामा और मौसी के सहयोग के प्रति भी आभार जताया।

अहान ने कहा कि पिता के अचानक निधन के बाद उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा परीक्षा में सफलता हासिल करने में लगा दी। मेरिट सूची में अपना नाम देखकर उन्हें पिता की बहुत याद आई।

अहान की मां राखी सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि परिवार के लिए यह बेहद खुशी का क्षण है, लेकिन इस ऐतिहासिक उपलब्धि को देखने के लिए अहान के पिता और दादा आज उनके बीच नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति पिछले करीब नौ वर्षों से बीमार थे, जिसके कारण परिवार को कई कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। इसके बावजूद अहान ने बचपन से ही पढ़ाई और अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।

उन्होंने बताया कि अहान अपने खान-पान, नींद और सुख-सुविधाओं को लेकर भी बेहद अनुशासित रहा है। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उसने यह मुकाम हासिल किया है।

पिता के साए के बिना कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए अहान सिंह की यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर प्रयास के सामने कठिन से कठिन परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन सकतीं।

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