धनबाद : कृषि विज्ञान केंद्र, धनबाद में शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त जारी होने के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की किस्त जारी की। कृषि विज्ञान केंद्र, धनबाद (बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके, रांची) में आयोजित प्रसारण कार्यक्रम में कुल 114 किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान दी गई जानकारी के अनुसार, देशभर के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में 18,690 करोड़ रुपये से अधिक की सम्मान राशि हस्तांतरित की गई। इसके साथ ही 521 कस्टम हायरिंग केंद्रों और 12 हॉर्टिकल्चर क्लस्टर यानी बागवानी समूहों का उद्घाटन किया गया। किसानों को कृषि क्षेत्र के विकास के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों के बारे में भी बताया गया।
फलदार पौधों के रोपण और नर्सरी स्थापना पर जोर
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, धनबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार ने किसानों को खेत बचाओ अभियान के प्रति जागरूक किया। उन्होंने फलदार पौधों के रोपण, पौध उत्पादन और नर्सरी की स्थापना से जुड़ी वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को खेती में वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
सरसों की उन्नत खेती की दी जानकारी
डॉ. आदर्श कुमार श्रीवास्तव ने क्लस्टर फ्रंटलाइन प्रदर्शन (सीएफएलडी) योजना के तहत किसानों को वितरित किए जा रहे सरसों के बीज की खेती के बारे में बताया। उन्होंने बीज की बुवाई की वैज्ञानिक विधि और उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देते हुए बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी पहलुओं पर प्रकाश डाला।
वहीं, डॉ. नवीन कुमार ने सीएफएलडी योजना के अंतर्गत वितरित किए जा रहे अलसी के बीज की बुवाई, फसल प्रबंधन और रोगों की रोकथाम के उपायों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जानकारी दी कि योजना के तहत किसानों को बीज के साथ टीसी और अन्य आवश्यक कृषि रसायन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि फसल का बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
सरकारी योजनाओं से किसानों को जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना, आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना तथा कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि को प्रोत्साहित करना था। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से किसानों तक योजनाओं और वैज्ञानिक खेती से जुड़ी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीमती रश्मि कंडुलना, श्री देव प्रकाश शुक्ला, श्री श्यामल सरकार, श्री मानिक राजक और कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।



