संतोष रंजन कुमार के अनुसार, संबंधित इलाके में आवासीय मकानों के साथ अनाथ बच्चों का एक आवासीय विद्यालय भी स्थित है। ऐसे में बड़ी संख्या में गैस सिलेंडरों को रखने, वाहनों पर लादने और उनके आवागमन को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि भंडारण, लोडिंग-अनलोडिंग और वितरण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, तो दुर्घटना की स्थिति पैदा हो सकती है।
स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
उपाध्यक्ष ने उपायुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि घरेलू गैस सिलेंडर ज्वलनशील पदार्थ से जुड़े होते हैं, इसलिए उनके भंडारण और वितरण में सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित स्थान पर सिलेंडरों की गतिविधियों के कारण स्थानीय नागरिकों में भय और चिंता का माहौल है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस विषय को लेकर पहले नगर पंचायत के नगर प्रबंधक राजकुमार वर्मा से मौखिक शिकायत की गई थी। हालांकि, संतोष रंजन कुमार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है। इसी के बाद उन्होंने जिला प्रशासन से लिखित रूप में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
सात बिंदुओं पर जांच कराने की मांग
संतोष रंजन कुमार ने उपायुक्त से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच कराने की मांग की है। उन्होंने गैस एजेंसी और सिलेंडर भंडारण स्थल का निरीक्षण कराने तथा अग्निशमन विभाग और संबंधित आपूर्ति विभाग की संयुक्त टीम से सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने का अनुरोध किया है।
इसके अलावा, गैस सिलेंडरों के भंडारण और वितरण से संबंधित लाइसेंस एवं अनुमतियों की जांच करने, आबादी और आवासीय विद्यालय के नजदीक भंडारण से जुड़े संभावित जोखिमों का आकलन करने तथा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। उन्होंने जांच के बाद की गई कार्रवाई की लिखित रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया है।
इस मामले में पत्र की प्रतिलिपि अनुमंडल पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला अग्निशमन पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी और नगर पंचायत अध्यक्ष को भी भेजी गई है, ताकि संबंधित विभाग अपने स्तर से आवश्यक कार्रवाई कर सकें।
फिलहाल, गैस एजेंसी के भंडारण स्थल की आधिकारिक जांच और जिला प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। संबंधित विभागों के निरीक्षण और जांच के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था तथा नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




