2022 से क्षेत्र में सक्रिय बताए जाते हैं उत्कर्ष महतो
उत्कर्ष महतो वर्ष 2022 से गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय बताए जाते हैं। खासकर पीरटांड़ प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में जनसंपर्क और स्थानीय समस्याओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी गतिविधियों की चर्चा होती रही है। उनके पिता भी वर्ष 2013 से क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। इस पृष्ठभूमि के कारण महतो परिवार का ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से संपर्क बताया जाता है।
झारखंड आंदोलन से जुड़ा रहा है परिवार
उत्कर्ष महतो के परिवार का दावा है कि उनके पिता झारखंड आंदोलनकारी रहे हैं। परिवार के अनुसार, झारखंड आंदोलन और डोमिसाइल आंदोलन के दौरान उन्हें 26 से अधिक मामलों का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, सीसीए के तहत कार्रवाई किए जाने की बात भी परिवार की ओर से कही जाती है। वर्ष 2020 में खुखरा थाना कैंप आंदोलन से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया है। परिवार की ओर से बताई गई यह पृष्ठभूमि उसकी सामाजिक और राजनीतिक यात्रा का हिस्सा रही है।
आजसू के कार्यक्रम के बाद राजनीतिक गतिविधियों पर नजर
11 अक्टूबर को गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में आजसू पार्टी ने उत्कर्ष महतो के नेतृत्व में एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में पार्टी के जिलाध्यक्ष गुड्डू यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। गिरिडीह को झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में आजसू के इस कार्यक्रम को स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों और नेतृत्व की सक्रियता के संदर्भ में देखा जा रहा है।
उत्कर्ष महतो की क्षेत्र में सक्रियता, उनके परिवार की सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि और आजसू के कार्यक्रम के बाद उनके संभावित चुनावी कदम को लेकर चर्चा बढ़ी है। फिलहाल राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम और पार्टी की रणनीति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, उत्कर्ष महतो या आजसू पार्टी की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए उनके चुनाव लड़ने की संभावना को फिलहाल अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपचुनाव और संभावित उम्मीदवारों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के लिए पार्टी की औपचारिक घोषणा तथा संबंधित आधिकारिक जानकारी का इंतजार रहेगा।




