गिरिडीह I कबरीबाद कोयला क्षेत्र में खनन गतिविधियों के बाद इसके भविष्य और पुनर्पयोग की संभावनाओं को लेकर शुक्रवार, 25 सितंबर को नगर भवन में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त रामनिवास यादव ने की। जिला प्रशासन ने जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC), आईआईटी कानपुर के सहयोग से बैठक आयोजित की, जिसमें सीसीएल के अधिकारियों के अलावा प्रभावित पंचायतों के जनप्रतिनिधि, खनन बंदी सलाहकार समिति के सदस्य और अन्य हितधारक शामिल हुए। बैठक में कुल 43 लोगों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य खनन गतिविधियां समाप्त होने के बाद कबरीबाद क्षेत्र का स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बेहतर इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर मंथन करना था। इस दौरान प्रभावित क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार और वैकल्पिक आजीविका के अवसर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में महिलाओं और युवाओं के लिए मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, डेयरी, मुर्गी पालन, जैविक खेती और वर्मी कम्पोस्ट जैसे स्वरोजगार आधारित विकल्पों पर सुझाव रखे गए। प्रतिभागियों ने कहा कि खनन क्षेत्र के पुनर्पयोग की योजना ऐसी होनी चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलें और उनकी आय के स्थायी साधन विकसित हो सकें।
इसके अलावा कबरीबाद क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा, पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और तकनीकी कौशल विकास को लेकर भी चर्चा हुई। खनन के बाद खाली अथवा प्रभावित भूमि का उपयोग किस तरह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है, इस पर भी विभिन्न पक्षों ने अपने सुझाव दिए।
बैठक में सामने आए सुझावों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संभावनाओं के आधार पर कबरीबाद कोयला क्षेत्र के लिए आगे पुनर्पयोग योजना तैयार की जाएगी। प्रशासन और संबंधित संस्थाओं का जोर ऐसी योजना तैयार करने पर है, जिसमें खनन के बाद क्षेत्र के पर्यावरणीय पुनर्स्थापन के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा सकें।




