रामगढ़ । रामगढ़-रांची फोरलेन की चुट्टूपालू घाटी मंगलवार की देर रात एक बार फिर भीषण सड़क हादसे से दहल उठी। सरिया से लदा एक ट्रेलर तेज ढलान पर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे करीब 15 से 20 फीट गहरे गड्ढे में जा गिरा। हादसा इतना भयावह था कि ट्रेलर में लदे भारी लोहे के सरिए झटके से आगे खिसक गए और केबिन को तोड़ते हुए चालक एवं खलासी को अपनी चपेट में ले लिया। दोनों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, ट्रेलर संख्या WBL 7826 सरिया लेकर रांची की ओर से रामगढ़ होते हुए हजारीबाग की तरफ जा रहा था। चुट्टूपालू घाटी में वन विभाग के रेस्ट हाउस के सामने तेज ढलान वाले हिस्से में अचानक ट्रेलर अनियंत्रित हो गया। चालक ने वाहन को संभालने और सड़क किनारे रोकने का प्रयास किया, लेकिन रफ्तार अधिक होने के कारण ट्रेलर सड़क से नीचे उतर गया और खाली स्थान में जाकर गहरे गड्ढे में पलट गया।

जोरदार टक्कर के बाद ट्रेलर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पीछे लदा सरिया आगे की ओर खिसककर सीधे केबिन में जा घुसा। इससे चालक और खलासी गंभीर रूप से फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस और राहत दल घटनास्थल पर पहुंचा। काफी मशक्कत के बाद एक शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया।
वहीं दूसरा शव केबिन और लोहे के सरियों के बीच बुरी तरह फंसा था। उसे निकालने के लिए हाइड्रा, क्रेन और अन्य भारी मशीनों की मदद ली गई। घंटों चले राहत एवं बचाव अभियान के दौरान एक-एक कर सरियों को हटाया गया। साथ ही गड्ढे में यह भी जांच की गई कि कहीं कोई अन्य व्यक्ति तो मलबे के नीचे नहीं दबा है। समाचार लिखे जाने तक दोनों मृतकों की पहचान नहीं हो सकी थी।
हादसों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
रामगढ़ थाना पुलिस के अनुसार, चुट्टूपालू घाटी में तीखी ढलान और दुर्घटना की आशंका के कारण अक्सर सड़क हादसे होते रहते हैं। लगातार दुर्घटनाओं के बीच स्थानीय लोगों ने एक बार फिर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसों को केवल वाहन चालकों की गलती या महज संयोग मानकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। उनका कहना है कि दुर्घटना संभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित चुट्टूपालू घाटी में पर्याप्त और स्थायी सुरक्षा इंतजाम अब भी जरूरी हैं।
लोगों के अनुसार, सड़क किनारे सुरक्षा दीवार बनाए जाने के बावजूद जल निकासी के लिए बनी नालियों की स्थिति को लेकर भी चिंताएं हैं। उनका कहना है कि अनियंत्रित भारी वाहन यदि सुरक्षा दीवार से टकराते हैं तो दूसरे वाहनों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
पिछले कुछ दिनों में घाटी क्षेत्र में अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रहे हादसों के बाद स्थानीय लोगों ने प्रभावी सुरक्षा उपाय, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, पर्याप्त चेतावनी संकेत, भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी तकनीकी समाधान की मांग की है।
दो लोगों की मौत के बाद एक बार फिर यही सवाल सामने है कि आखिर चुट्टूपालू घाटी में हादसों का सिलसिला कब थमेगा और कब यह खतरनाक रास्ता सुरक्षित सफर की राह बन सकेगा।




