रामगढ़ । जिले की चुटूपालू घाटी में रविवार को एक बार फिर भीषण सड़क हादसा हुआ। रांची से रामगढ़ की ओर आ रहा कंटेनर संख्या NL 01AB 8418 अचानक ब्रेक फेल होने के बाद अनियंत्रित हो गया और आगे चल रही होंडा कार को जोरदार टक्कर मारते हुए उसके ऊपर चढ़ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार कंटेनर के नीचे बुरी तरह दब गई।
हादसे में कार सवार सारा तबस्सुम (45) की मौत हो गई, जबकि फिरोज राही (48), तरजा सलियां (23), सिफ्ता ताजमीन, अमीरा ताजमीन (10) और अनुजा तबस्सुम घायल हो गए। घायलों में रामगढ़ मुख्यालय डीएसपी अकरम रजा के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। सभी लोग रांची से रामगढ़ की ओर आ रहे थे।
हादसे की सूचना मिलते ही रामगढ़ थाना की गश्ती टीम घटनास्थल पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। कार कंटेनर के नीचे बुरी तरह फंसी होने के कारण पुलिस ने तत्काल हाइड्रा और क्रेन मंगवाया। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। रामगढ़ थाना के पुलिस अवर निरीक्षक दीपक रजक, पंकज कुमार सिंह समेत पुलिस टीम ने काफी मशक्कत के बाद कंटेनर को हटाकर कार को बाहर निकाला।
दो महिलाओं और चालक को तत्काल रामगढ़ सदर अस्पताल भेजा गया। वहीं एक बच्ची कार के अंदर बुरी तरह फंसी हुई थी। करीब आधे घंटे तक चले रेस्क्यू के बाद बच्ची को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
पुलिस अवर निरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी। हाइड्रा और क्रेन की मदद से कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया और सभी घायलों को अस्पताल भेजने की व्यवस्था की गई।
परिवार के साथ हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्यालय डीएसपी अकरम रजा भी घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर रामगढ़ थाना के एसआई दीपक कुमार, मंजेश कुमार, पंकज कुमार और रोशन बाड़ा समेत पुलिस टीम मौजूद रही और राहत-बचाव अभियान की निगरानी करती रही।
घटना की जानकारी मिलने के बाद रामगढ़ एसपी मुकेश कुमार लुणायत, एसडीपीओ आलोक रंजन और गोपनीय शाखा प्रभारी रविंद्र कुमार गुप्ता समेत अन्य पुलिस अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घायलों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। घायलों को सदर अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों में भी भर्ती कराया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया।
लगातार हादसों से ‘मौत की घाटी’ बनी चुटूपालू

चुटूपालू घाटी में लगातार हो रहे सड़क हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था और एनएचएआई की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार और भारी वाहनों के अनियंत्रित होने के कारण इस घाटी में लगातार दुर्घटनाएं होती रही हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। दुर्घटनाओं में वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंचता है।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारण चुटूपालू घाटी को अब स्थानीय लोग ‘मौत की घाटी’ के नाम से भी संबोधित करने लगे हैं। जिला प्रशासन की ओर से सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एनएचएआई को कई दिशा-निर्देश दिए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बावजूद हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
हर दुर्घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव अभियान चलाती है और घायलों को अस्पताल पहुंचाती है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि चुटूपालू घाटी में हादसों को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था कब लागू होगी।
रविवार को हुई इस दुर्घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि आखिर कब चुटूपालू घाटी को लगातार हादसों की चपेट में आने से बचाया जाएगा और कब एनएचएआई ऐसी ठोस व्यवस्था करेगा, जिससे वाहन चालकों और आम लोगों की जान सुरक्षित रह सके।




