डीएम के औचक निरीक्षण से खुली पोल, अस्पताल में डॉक्टर नदारद, स्कूल में भी गड़बड़ी

      प्रतापगढ़, (उत्तर प्रदेश ) — शनिवार की सुबह जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय के अचानक किए गए निरीक्षण से जिले की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर सामने आ गई। बिना किसी पूर्व सूचना के डीएम प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सुखपाल नगर और प्राथमिक

 

 

 

प्रतापगढ़, (उत्तर प्रदेश ) — शनिवार की सुबह जिलाधिकारी अभिषेक पाण्डेय के अचानक किए गए निरीक्षण से जिले की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर सामने आ गई। बिना किसी पूर्व सूचना के डीएम प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सुखपाल नगर और प्राथमिक विद्यालय पूरे रायजू पहुंच गए।

 उनके अचानक पहुंचते ही स्वास्थ्यकर्मियों और शिक्षकों में हलचल दिखाई दी। जिलाधिकारी ने कागजों में दर्ज दावों पर भरोसा करने के बजाय मौके पर मौजूद व्यवस्थाओं और लोगों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की।

सबसे पहले जिलाधिकारी सुखपाल नगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे। यहां उन्होंने इलाज कराने आए मरीजों से सीधे बातचीत की। डीएम ने मरीजों से पूछा कि उन्हें उपचार ठीक से मिल रहा है या नहीं, अस्पताल में दवाएं उपलब्ध हैं या नहीं और चिकित्सकों की ओर से बाहर की दवाएं तो नहीं लिखी जा रही हैं। मरीजों ने बताया कि उन्हें बाहर से दवाएं खरीदने के लिए नहीं कहा जा रहा है।

इसके बाद डीएम पर्चा काउंटर पर पहुंचे और वहां मरीजों की संख्या तथा पर्ची बनाने की प्रक्रिया की जानकारी ली। संबंधित कर्मचारी ने बताया कि उस समय तक सौ से अधिक मरीजों की पर्चियां बनाई जा चुकी थीं। कर्मचारी ने यह भी बताया कि दोपहर दो बजे तक मरीजों के लिए पर्चियां बनाने की व्यवस्था रहती है।

जिलाधिकारी ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से भी बातचीत कर उनके इलाज और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने प्रसव यूनिट का निरीक्षण किया और प्रसव से जुड़ी व्यवस्थाओं के साथ मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के संबंध में भी डीएम ने जानकारी ली। स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में धनराशि भेजी जाती है और सामान्य तौर पर इसमें 10 से 15 दिन का समय लगता है। हालांकि निरीक्षण के दौरान महिला चिकित्साधिकारी डॉ. शिवानी सिंह अनुपस्थित मिलीं। चिकित्साधिका

री की गैरहाजिरी पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए। सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के लिए चिकित्सक की उपलब्धता सबसे जरूरी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य केन्द्र के बाद जिलाधिकारी प्राथमिक विद्यालय पूरे रायजू पहुंचे। यहां भी उन्होंने औपचारिक निरीक्षण के बजाय सीधे कक्षाओं में जाकर बच्चों से बातचीत की। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षण व्यवस्था के बारे में सवाल किए। बच्चों से बातचीत के जरिए उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि विद्यालय में पढ़ाई और सुविधाओं की वास्तविक स्थिति कैसी है।

डीएम ने विद्यालय में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति पंजिका भी देखी। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में शत-प्रतिशत उपस्थिति नहीं मिली। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विद्यालय में ऐसा माहौल होना चाहिए, जहां शिक्षक नियमित रूप से मौजूद रहें और बच्चे भी पूरे उत्साह के साथ स्कूल आएं।

जिलाधिकारी ने विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्री से केन्द्र की व्यवस्थाओं, बच्चों की स्थिति और उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली।

डीएम के इस औचक निरीक्षण ने एक ओर जहां स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक की अनुपस्थिति को उजागर किया, वहीं विद्यालय में विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए। जिलाधिकारी ने दोनों विभागों से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

 

 

 

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