अमरपाल मौर्य का संघर्षमय सफर, अब भाजपा ने सौंपी राष्ट्रीय बड़ी जिम्मेदारी

प्रतापगढ़ के साधारण किसान परिवार से निकले अमरपाल मौर्य अब भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे; संगठन में उनका लंबा अनुभव नई जिम्मेदारी में काम आएगा।

लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य को भाजपा ओबीसी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर संगठन में उन्हें अहम जिम्मेदारी सौंपी है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक कामकाज और जमीनी सक्रियता के लिए पहचान बनाने वाले अमरपाल मौर्य अब राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़े वर्गों के बीच भाजपा के संगठन को मजबूत करने की भूमिका निभाएंगे।

अमरपाल मौर्य की राजनीतिक यात्रा संघर्ष, संगठन और लगातार सक्रियता से जुड़ी रही है। प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले मौर्य का शुरुआती जीवन एक साधारण किसान परिवार में बीता। परिवार के साथ उन्होंने सब्जियां उगाने और बाजार में बेचने का काम भी किया। यही वजह है कि उनके राजनीतिक सफर को अक्सर जमीनी कार्यकर्ता से राज्यसभा तक पहुंचने की कहानी के रूप में देखा जाता है।

आरएसएस से भाजपा संगठन तक का सफर

अमरपाल मौर्य ने छात्र जीवन से ही राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में रुचि लेना शुरू किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ काम किया और बाद में भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके राजनीतिक सफर में मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती के साथ काम करने का दौर भी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने उमा भारती के निजी सहायक के तौर पर काम किया और इस दौरान संगठन की कार्यशैली को करीब से समझने का अवसर मिला।

संगठन में लगातार सक्रिय रहने के बाद भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रदेश महामंत्री बनाया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें ऊंचाहार विधानसभा सीट से मैदान में उतारा। यहां उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनोज कुमार पांडेय से हुआ। चुनाव में उन्हें करीब तीन प्रतिशत मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद संगठन में उनकी सक्रियता और जिम्मेदारियां बनी रहीं।

2024 में राज्यसभा पहुंचे अमरपाल मौर्य

वर्ष 2024 में भाजपा ने अमरपाल मौर्य को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा। राज्यसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनका नाम उत्तर प्रदेश से भाजपा के सदस्य के रूप में दर्ज है। सदन में वे प्रतापगढ़ समेत उत्तर प्रदेश से जुड़े मुद्दे भी उठाते रहे हैं।

राज्यसभा तक पहुंचना उनके लिए संगठनात्मक राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति में बड़े विस्तार के तौर पर देखा गया। लंबे समय तक पार्टी के जमीनी संगठन में काम करने के बाद उन्हें संसद में प्रतिनिधित्व का मौका मिला।

अब ओबीसी मोर्चे की राष्ट्रीय जिम्मेदारी

भाजपा के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अमरपाल मौर्य के सामने देशभर में पिछड़े वर्गों के बीच संगठन की सक्रियता बढ़ाने और विभिन्न ओबीसी समूहों तक पार्टी की पहुंच मजबूत करने की चुनौती होगी। साथ ही केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों की नीतियों को इन वर्गों तक पहुंचाना भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहेगा।

उत्तर प्रदेश के लिहाज से भी उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य की राजनीति में पिछड़ा वर्ग एक बड़ा सामाजिक आधार है और भाजपा लंबे समय से गैर-यादव ओबीसी समूहों के बीच अपना संगठनात्मक प्रभाव मजबूत करने पर जोर देती रही है।

सब्जी बेचने वाले किसान परिवार से निकलकर भाजपा संगठन में पहचान बनाने, विधानसभा चुनाव लड़ने, राज्यसभा सांसद बनने और अब ओबीसी मोर्चे की राष्ट्रीय कमान तक पहुंचने का अमरपाल मौर्य का सफर पार्टी के जमीनी संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए एक प्रेरक राजनीतिक यात्रा के तौर पर देखा जा रहा है।

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