अमेठी। 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ अमेठी में संभावित प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच भाजपा के ओबीसी नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अमेठी विधानसभा सीट से अब तक हरिचरण यादव तीन बार, गायत्री प्रसाद प्रजापति एक बार और वर्तमान विधायक महाराजी प्रजापति के रूप में कुल पांच बार ओबीसी चेहरे विधानसभा पहुंच चुके हैं। हालांकि इनमें भाजपा का कोई प्रत्याशी शामिल नहीं रहा। ऐसे में पार्टी के भीतर और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि भाजपा अपने मजबूत ओबीसी नेताओं में से किसी को 2027 में मौका देगी या नहीं।
इसी चर्चा के बीच जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि घनश्याम चौरसिया एडवोकेट का नाम संभावित दावेदारों में सामने आ रहा है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय चौरसिया दो अलग-अलग वार्डों से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत चुके हैं। क्षेत्र पंचायत स्तर पर भी लंबे समय तक उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ को उनकी राजनीतिक ताकत के तौर पर देखा जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में जनसंपर्क और सामाजिक गतिविधियों के कारण उनकी दावेदारी को लेकर समर्थकों के बीच चर्चा बनी हुई है।
वहीं भाजपा की युवा राजनीति से जुड़े महेश सोनी का नाम भी तेजी से चर्चा में आया है। भाजयुमो के पूर्व पदाधिकारी और उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष के रूप में सक्रिय सोनी जनहित के मुद्दों पर मुखर रहने और पार्टी कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए जाने जाते हैं। जरूरतमंदों की सहायता और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क को भी उनकी राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा माना जाता है। नगर पंचायत चुनाव में उनके प्रदर्शन ने भी पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता को चर्चा में ला दिया है।
पुराने समीकरण बनाम नए चेहरे
अमेठी की राजनीति में ओबीसी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में भाजपा के सामने 2027 में प्रत्याशी चयन को लेकर कई राजनीतिक समीकरणों पर विचार करने की चुनौती होगी। एक ओर पार्टी के स्थापित चेहरों और पुराने चुनावी समीकरणों को महत्व देने की संभावना है, वहीं दूसरी ओर मजबूत स्थानीय जनाधार रखने वाले नए सामाजिक समीकरणों के प्रतिनिधियों को मौका देने की चर्चा भी है।
हालांकि अभी भाजपा की ओर से अमेठी विधानसभा सीट के लिए किसी संभावित प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। घनश्याम चौरसिया और महेश सोनी के नाम फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित हैं।
अब देखना यह होगा कि 2027 के चुनाव में भाजपा अमेठी में अपने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों पर भरोसा करती है या ओबीसी प्रतिनिधित्व को केंद्र में रखते हुए किसी नए चेहरे पर दांव लगाती है। प्रत्याशी चयन के साथ ही यह स्पष्ट होगा कि अमेठी की सियासत में कौन-सा सामाजिक और राजनीतिक समीकरण आगे बढ़ता है।




