संसद में पप्पू यादव के भगवा वेश प्रदर्शन पर एफआईआर
सुधीर रंजन
लखनऊ। बीते दिनों संसद परिसर में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा (साधु) वेश धारण कर राम मंदिर चंदे को लेकर किए गए सांकेतिक प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। इस प्रदर्शन में विपक्ष के कुछ अन्य सांसद भी शामिल थे। हालांकि प्रदर्शन का उद्देश्य राम मंदिर के चंदे के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाना बताया गया, लेकिन देश के संत समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों ने इसे साधु वेश और सनातन आस्था का खुला अपमान करार दिया है।
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक केंद्रों पर इस घटना को लेकर तीव्र आक्रोश देखने को मिल रहा है। वाराणसी में संतों एवं अधिवक्ताओं ने पप्पू यादव, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के फैजाबाद सांसद अवधेश प्रसाद सहित अन्य नेताओं के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद विरोध की यह आग वाराणसी से लेकर अयोध्या और प्रदेश के अन्य जिलों तक फैल गई है।
प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर संत समाज के प्रतिनिधियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। संतों का कहना है कि राजनीतिक विरोध के लिए धार्मिक प्रतीकों, भगवा वस्त्रों और साधु वेश का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। वहीं, विपक्षी नेताओं का तर्क है कि उनका उद्देश्य कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मुद्दे को उजागर करना था, न कि किसी धर्म या संत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाना।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि धार्मिक प्रतीकों और साधु वेश का राजनीतिक प्रदर्शन में उपयोग बिल्कुल उचित नहीं है। सनातन परंपरा और संत समाज की गरिमा का सर्वोपरि सम्मान किया जाना चाहिए।”
जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष सपा अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि सरकार वास्तविक भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, उन्होंने पप्पू यादव के संसद प्रदर्शन पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया। संसद परिसर के प्रदर्शन में शामिल रहे सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने विपक्ष का बचाव करते हुए इसे राम मंदिर चंदे में कथित अनियमितताओं के खिलाफ एक लोकतांत्रिक आवाज बताया। उनका नाम भी वाराणसी की एफआईआर में शामिल है।
योगी सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कड़े शब्दों में पप्पू यादव समेत इसमें शामिल नेताओं की निंदा करते हुए कहा कि साधु वेश और सनातन परंपरा का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करोड़ों देशवासियों और श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने विपक्ष से सार्वजनिक माफी की मांग की।
चित्रगुप्त पीठ मथुरा के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मथुरा में विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसद पप्पू यादव की लोकसभा सदस्यता तत्काल समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा और सनातन संस्कृति का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि का प्राथमिक संवैधानिक दायित्व है।
इस घटनाक्रम के बाद से राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का माध्यम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल और संत समाज इसे सनातन आस्था पर सुनियोजित प्रहार मान रहे हैं। यह मामला अब केवल संसद तक सीमित न रहकर कानूनी पचड़े और सड़क की सियासत का एक बड़ा केंद्र बन चुका है, जिसके आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ने के आसार हैं।
अंत में अगर बात प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की बात करें तो सांसद राजीव राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पप्पू यादव हमारी पार्टी के नहीं हैं। जबकि पार्टी के दो अन्य सांसद अवधेश प्रसाद और डिंपल यादव की तस्वीरें पप्पू यादव के प्रदर्शन के दौरान नजर आईं थीं। प्रदेश में लोगों की इस मामले में नकारात्मक प्रतिक्रिया से सपा ने खुद को लगभग पूरे मामले से खुद को अलग ही रखने की कोशिश की है।




