मनीष सिन्हा
धनबाद : खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS), धनबाद में राजभाषा पखवाड़ा–2026 के तहत हिंदी साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में प्रांतीय स्तर के कवियों और रचनाकारों ने काव्य, ग़ज़ल तथा हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों से साहित्यिक माहौल को जीवंत बना दिया। रचनाओं की विविधता और प्रभावी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को पूरे कार्यक्रम के दौरान बांधे रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ खान सुरक्षा महानिदेशालय के महानिदेशक श्री आर. टी. मांडेकर ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर श्री अजय सिंह, उपमहानिदेशक (विद्युत) सह राजभाषा अधिकारी, श्री वीर प्रताप, उपमहानिदेशक (मुख्यालय) तथा श्री आर. ओ. पी. वर्मा, उपनिदेशक (विद्युत) सह प्रभारी राजभाषा अधिकारी मंचासीन रहे।
अपने संबोधन में श्री आर. टी. मांडेकर और श्री अजय सिंह ने हिंदी भाषा एवं साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे आयोजनों को साहित्यिक रुचि विकसित करने और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने का प्रभावी माध्यम बताया।
साहित्यिक सत्र में श्री अनंत महेंद्र ने मंच संचालन के साथ काव्य पाठ प्रस्तुत किया। श्री बसंत जोशी की हास्य-व्यंग्य रचनाओं ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। वहीं, श्रीमती रीना यादव की ग़ज़ल प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भावपूर्ण माहौल बना दिया। श्री नीतेश मिश्रा, श्रीमती प्रीति कर्ण और श्री पंकज कुमार दुबे ने भी अपनी विविध रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की सराहना हासिल की। कवियों की प्रस्तुतियों के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
कार्यक्रम में रचनाकारों और अतिथियों का स्वागत श्री सुजीत कटेवा, निदेशक (वी.का.) ने किया। श्री प्रशांत डाकरे, उपनिदेशक (वी.का.) ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। वहीं, श्री हेमंत गौतम, उपनिदेशक ने उद्घोषक की भूमिका निभाई।
सम्मेलन के सफल आयोजन में आयोजन समिति के सदस्यों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। श्री सुबीर मुर्मू, श्री रिजवान अहसन, श्री बिमल कुमार यादव, श्री रणधीर कुमार और श्री नंद किशोर साव सहित समिति के अन्य सदस्यों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
राजभाषा पखवाड़ा–2026 के अंतर्गत आयोजित इस साहित्य सम्मेलन ने DGMS में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि को बढ़ाने के साथ रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराया। कार्यक्रम ने साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से हिंदी के प्रति जागरूकता और साहित्यिक चेतना को भी मजबूत किया।



