तड़के तीन बजे हुआ हादसा, घंटों चला राहत-बचाव अभियान
नगरपालिका द्वारा जर्जर भवनों की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल
प्रतापगढ़।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के नगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत महुली वार्ड में गुरुवार तड़के हुए एक भीषण हादसे ने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया। करीब सुबह तीन बजे एक सदी पुराना जर्जर मकान अचानक भरभराकर ढह गया। मलबे में दबने से एक ही परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार का एक सदस्य चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गया। हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया और परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा।
जानकारी के अनुसार हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव, उनकी पत्नी रीता श्रीवास्तव, बेटे नितिन, पुत्री माधुरी तथा दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। घंटों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद सभी को मलबे से बाहर निकालकर जिला अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। परिवार का सदस्य अमन इस हादसे में सुरक्षित बच गया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद नगर क्षेत्र में जर्जर भवनों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह मकान लगभग 100 वर्ष पुराना था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नगरपालिका ने इस भवन को खतरनाक घोषित कर कोई नोटिस जारी की थी? यदि नोटिस दी गई थी तो उसका पालन क्यों नहीं कराया गया और यदि नहीं दी गई थी तो इतने जर्जर भवन की स्थिति प्रशासन की नजर से कैसे ओझल रही? इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जुट गए। एक ही परिवार के छह सदस्यों की असामयिक मौत से पूरे महुली वार्ड और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि स्थानीय लोग जर्जर भवनों का तत्काल सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।




